पटना NEET छात्रा मौत मामला: हॉस्टल संचालक मनीष रंजन को मिली जमानत


 

NEET छात्रा केस डिफॉल्ट बेल को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। NEET छात्रा केस डिफॉल्ट बेल में केंद्रीय जांच एजेंसी की चूक के कारण मुख्य आरोपी को जमानत मिल गई है। इस फैसले ने न केवल जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

पटना के इस चर्चित मामले में अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है।

समय पर चार्जशीट नहीं, आरोपी को मिली राहत

पटना में NEET छात्रा मौत मामले की जांच कर रही Central Bureau of Investigation समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी।

इस वजह से कोर्ट ने मुख्य आरोपी मनीष रंजन को डिफॉल्ट बेल दे दी।

यह जमानत ‘पॉक्सो कोर्ट’ द्वारा दी गई, जो इस मामले की सुनवाई कर रहा है।

इस निर्णय ने जांच एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या होती है डिफॉल्ट बेल?

डिफॉल्ट बेल एक कानूनी अधिकार है, जो आरोपी को तब मिलता है जब जांच एजेंसी तय समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती।

कानून के अनुसार, गंभीर मामलों में चार्जशीट दाखिल करने के लिए अधिकतम 90 दिन का समय दिया जाता है।

यदि इस अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं होता, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।

यह प्रावधान न्याय प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

90 दिन की समय सीमा क्यों हुई अहम?

इस मामले में CBI को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी थी।

लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर ऐसा नहीं हो सका।

पीड़िता के वकील ने आरोप लगाया कि कोर्ट ने कई बार आदेश दिया, फिर भी एजेंसी ने समय पर कार्रवाई नहीं की।

इसी आधार पर आरोपी को जमानत मिल गई।

कौन हैं आरोपी मनीष रंजन?

मनीष रंजन पटना के शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक हैं।

इसी हॉस्टल में पढ़ने वाली NEET छात्रा के साथ कथित घटना हुई थी, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।

अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

इस मामले में पटना पुलिस ने 14 जनवरी 2026 को मनीष रंजन को गिरफ्तार किया था।

जांच CBI को क्यों सौंपी गई?

शुरुआत में इस केस की जांच पटना पुलिस कर रही थी।

मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए बाद में जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी गई।

परिवार और समाज के कई वर्गों ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

लेकिन अब एजेंसी की चूक ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित पक्ष का क्या कहना है?

पीड़िता के वकील ने कहा है कि न्याय के लिए लड़ाई जारी रहेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया।

वकील के अनुसार, यह लापरवाही न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।

आगे क्या होगा?

डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद आरोपी को राहत जरूर मिली है, लेकिन केस खत्म नहीं हुआ है।

मामले की सुनवाई जारी रहेगी और जांच एजेंसी को आगे अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।

अगर चार्जशीट दाखिल होती है, तो आरोपी को फिर से कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

इस केस पर अब सभी की नजर बनी हुई है।


Source: कोर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स

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