महिला आरक्षण को लेकर संसद में एक बार फिर अहम बहस छिड़ गई है। महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री की अपील ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने सभी दलों से राजनीति से ऊपर उठकर ऐतिहासिक फैसला लेने का आग्रह किया, जिससे देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण में उचित भागीदारी मिल सके।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब महिला सशक्तिकरण और प्रतिनिधित्व का मुद्दा लगातार प्रमुखता से उठ रहा है।
राजनीति से ऊपर उठने की अपील
संसद में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्पष्ट कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा निर्णय है।
उनके अनुसार, सभी दलों को एकजुट होकर इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।
लोकतंत्र में नया अध्याय जोड़ने का अवसर
प्रधानमंत्री ने भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” बताते हुए कहा कि यह क्षण ऐतिहासिक है।
उन्होंने माना कि यह कदम 25–30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था।
अगर ऐसा होता, तो आज महिला नेतृत्व और अधिक परिपक्व रूप में सामने आता।
अब यह अवसर है कि इस कमी को दूर किया जाए।
विकसित भारत के लिए जरूरी भागीदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल आर्थिक विकास नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नीति-निर्धारण में सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
देश की 50% आबादी को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना न्यायसंगत नहीं है।
महिलाओं की भागीदारी से शासन अधिक संतुलित और प्रभावी बनेगा।
ग्रासरूट स्तर पर मजबूत हुआ महिला नेतृत्व
प्रधानमंत्री ने पंचायत और स्थानीय निकायों का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले तीन दशकों में महिलाओं ने मजबूत नेतृत्व क्षमता दिखाई है।
लाखों महिलाएं गांव और शहर स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
अब वे राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
यह अनुभव संसद की कार्यक्षमता को बढ़ा सकता है।
महिलाओं की क्षमता पर भरोसा जरूरी
Narendra Modi ने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन पर भरोसा जताना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को खुद तय करने का अवसर मिलना चाहिए कि वे प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित करें।
यह कदम उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मदद करेगा।
संविधान की ताकत और समान अवसर
प्रधानमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संविधान की ताकत ने उन्हें इस पद तक पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि यही संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर देता है।
महिला आरक्षण भी इसी भावना का विस्तार है, जो समाज को अधिक समावेशी बनाएगा।
हर क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियां
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
ऐसे में उन्हें नीति-निर्धारण से दूर रखना उनके सामर्थ्य के साथ अन्याय होगा।
महिलाओं की भागीदारी से देश की प्रगति को नई दिशा मिल सकती है।
जल्द अमल की जरूरत पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विधेयक को लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि 2029 तक इसे लागू करने का अवसर है।
समय पर निर्णय लेने से देश को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
सर्वसम्मति से पास करने की अपील
प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का निर्णय होगा।
क्रेडिट की राजनीति से ऊपर उठकर यह फैसला लिया जाना चाहिए।
यह देश की नारी शक्ति के लिए एक मजबूत संदेश होगा।
Source: पीआईबी (Press Information Bureau)
