
भारत में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में दिव्यास्त्र ड्रोन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लखनऊ की एक प्राइवेट कंपनी ने 24 साल के युवा के नेतृत्व में यह दिव्यास्त्र ड्रोन विकसित किया है, जो 2000KM तक दुश्मन पर हमला कर सकता है। यह ड्रोन भारत में बनाया गया है, हाल ही में परीक्षण किया गया और सेना के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कम लागत में अधिक मारक क्षमता देना है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस किया गया है।
क्या है ‘दिव्यास्त्र’ ड्रोन और क्यों है खास?
‘दिव्यास्त्र’ एक स्वदेशी ड्रोन/यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) है, जिसे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी और हाई-प्रिसिजन अटैक क्षमता है।
यह ड्रोन न केवल सर्विलांस कर सकता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सीधे हमला भी कर सकता है।
इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह अपने टारगेट को खुद पहचान सकता है और सटीक निशाना साध सकता है।
रेंज, स्पीड और पेलोड: जानें ताकत
दिव्यास्त्र ड्रोन के अलग-अलग वर्जन बनाए गए हैं, जिनमें अलग-अलग क्षमताएं हैं:
- शुरुआती वर्जन की रेंज: 500 किलोमीटर
- अधिकतम पेलोड: 15 किलो विस्फोटक
- उड़ान ऊंचाई: 10,000 फीट
- स्पीड: लगभग 140 किमी/घंटा
जैसे ही टारगेट लॉक होता है, यह ड्रोन 550-600 किमी/घंटा की स्पीड से हमला करता है।
वहीं इसका एडवांस वर्जन दिव्यास्त्र मार्क-2 और भी ज्यादा खतरनाक है:
- रेंज: 2000 किलोमीटर
- पेलोड: 80 किलो तक
- चौड़ाई: 3 मीटर से अधिक
24 साल के युवा ने किया कमाल
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे एक 24 साल के युवा और उनकी टीम ने तैयार किया है।
कंपनी के फाउंडर्स ने पहले ‘बाज’ नाम का ड्रोन बनाया था, जिसकी रेंज करीब 10 किलोमीटर थी और वह सर्विलांस व अटैक दोनों कर सकता था।
‘दिव्यास्त्र’ उसी अनुभव का अगला और बड़ा कदम है।
युवाओं के इस इनोवेशन ने दिखाया है कि भारत में डिफेंस टेक्नोलॉजी का भविष्य मजबूत हो रहा है।
कम लागत में ज्यादा ताकत
दिव्यास्त्र ड्रोन की कीमत को लेकर कंपनी ने खुलासा नहीं किया है, लेकिन दावा किया गया है कि इसकी लागत बाजार में उपलब्ध समान ड्रोन के मुकाबले लगभग एक-तिहाई है।
इसका मतलब है कि कम बजट में ज्यादा मारक क्षमता हासिल की जा सकती है।
सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देते हुए डिफेंस कॉरिडोर में 55,000 स्क्वायर फीट जमीन लीज पर दी है।
भारत बनाम दुनिया: कहां खड़े हैं हम?
दुनिया के कई देश, खासकर ईरान जैसे देश, बड़े पैमाने पर ड्रोन उत्पादन कर रहे हैं।
भारत में तकनीकी क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन अभी चुनौती बना हुआ है।
फिलहाल यह कंपनी हर महीने करीब 20 ड्रोन बनाने की क्षमता रखती है, जिसे बेहतर फंडिंग मिलने पर बढ़ाया जा सकता है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से लोगों को यह भरोसा मिलेगा कि भारत अपनी रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बन रहा है।
कम लागत वाले और हाई-टेक ड्रोन सेना को मजबूत करेंगे, जिससे देश की सुरक्षा और बेहतर होगी।
साथ ही, युवाओं के लिए डिफेंस टेक्नोलॉजी में नए अवसर भी खुलेंगे।
आगे क्या?
कंपनी का लक्ष्य भविष्य में और ज्यादा एडवांस और हाई-स्पीड ड्रोन बनाना है।
अगर सरकार और निवेशकों का सहयोग मिलता रहा, तो भारत ड्रोन टेक्नोलॉजी में दुनिया के बड़े देशों को टक्कर दे सकता है।
Source: मीडिया रिपोर्ट्स और कंपनी इनपुट