शराबबंदी हटेगी? अगले 3-4 महीने में बिहार में आएगा आर्थिक संकट, प्रशांत किशोर ने की भविष्यवाणी


 

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। शराबबंदी कानून पर जन सुराज के सूत्रधार Prashant Kishor ने बड़ा दावा किया है कि राज्य सरकार अगले 3-4 महीनों में इसे हटाने को मजबूर हो सकती है। उन्होंने इसके पीछे आर्थिक संकट को मुख्य वजह बताया है।

इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

आर्थिक संकट बना बड़ा कारण?

प्रशांत किशोर का कहना है कि बिहार सरकार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा और ठेकेदारों का भुगतान भी लंबित है।

इसके अलावा पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के लिए फंड की कमी बताई जा रही है।

‘बहुमत जुटाने में हुआ भारी खर्च’

Prashant Kishor ने यह भी कहा कि सरकार बनाने के लिए जो राजनीतिक प्रयास हुए, उसमें भारी खर्च हुआ है।

उनके मुताबिक, इसका असर अब राज्य की वित्तीय स्थिति पर दिख रहा है।

उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

बीजेपी और नेतृत्व पर निशाना

प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि बिहार में जो भी नया मुख्यमंत्री बनेगा, वह Amit Shah के प्रभाव में काम करेगा।

उनका आरोप है कि राज्य की नीतियां स्थानीय जरूरतों के बजाय अन्य राज्यों के मॉडल से प्रभावित होंगी।

मुफ्त बिजली पर भी उठाए सवाल

पीके ने सरकार की मुफ्त बिजली योजना पर भी सवाल खड़े किए।

उनका कहना है कि बिजली मुफ्त देने के नाम पर दरों में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ रहा है।

उन्होंने इसे “नीतिगत विरोधाभास” बताया।

नीतीश कुमार की भूमिका पर टिप्पणी

Nitish Kumar को लेकर भी प्रशांत किशोर ने टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में उन्हें केवल एक “चेहरा” बनाकर पेश किया जा रहा है।

वास्तविक निर्णय कहीं और से लिए जा रहे हैं, ऐसा उनका दावा है।

‘खरीदा हुआ बहुमत’ का आरोप

प्रशांत किशोर ने सरकार पर “खरीदे गए बहुमत” का आरोप भी लगाया।

उनका कहना है कि जिन लोगों ने बहुमत दिलाया, वही अब सरकार की दिशा तय कर रहे हैं।

इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत बयान

प्रशांत किशोर सहरसा में ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे।

इस दौरान उन्होंने कहा कि जन सुराज जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेगा और मुद्दों को उठाता रहेगा।

उन्होंने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी।

क्या सच में हटेगा शराबबंदी कानून?

विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी कानून बिहार की राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है।

इसे हटाने या बनाए रखने का फैसला पूरी तरह राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

बयान से तेज हुई सियासत

कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

शराबबंदी कानून को लेकर आने वाले महीनों में क्या फैसला होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

यह मुद्दा आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।


Source: जन सुराज बयान, मीडिया रिपोर्ट्स

और नया पुराने
हमसे जुड़ें
1

बड़ी खबर सबसे पहले पाएं!

देश, बिहार और नौकरी से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।

👉 अभी WhatsApp चैनल जॉइन करें
होम क्विज वीडियो नोट्स NCERT