बिहार में प्रमाण पत्र नए नियम लागू होने के बाद आम लोगों और छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रमाण पत्र नए नियम के तहत अब जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहले से अधिक दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं। इस बदलाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों के आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं और उन्हें बार-बार आरटीपीएस काउंटर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सरकार का दावा है कि इन बदलावों से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नए नियम से क्यों बढ़ी परेशानी?
नए नियम लागू होने के बाद प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले जटिल हो गई है।
पहले जहां केवल आधार कार्ड से आवेदन संभव था, अब कई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करना जरूरी हो गया है।
इस बदलाव की जानकारी न होने के कारण लोग अधूरे दस्तावेज के साथ आवेदन कर रहे हैं और उनका आवेदन खारिज हो रहा है।
ऑनलाइन आवेदन भी हो रहे रिजेक्ट
अब सिर्फ ऑफलाइन ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन आवेदन भी बड़ी संख्या में रिजेक्ट हो रहे हैं।
वसुधा केंद्र, साइबर कैफे या अन्य माध्यमों से किए गए आवेदन अधूरे दस्तावेज के कारण स्वीकार नहीं किए जा रहे।
इससे लोगों को बार-बार आवेदन करना पड़ रहा है, जिससे समय और मेहनत दोनों बढ़ रहे हैं।
जाति प्रमाण पत्र के लिए जरूरी दस्तावेज
नए नियमों के अनुसार जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब जमीन और राजस्व से जुड़े दस्तावेज जरूरी कर दिए गए हैं।
इनमें खतियान, दान पत्र, जमीन के कागजात या भूमिहीनों के लिए पर्चा शामिल है।
इन दस्तावेजों के बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे कई लोगों को परेशानी हो रही है।
आय प्रमाण पत्र के लिए क्या बदल गया?
आय प्रमाण पत्र के लिए भी अब नियम सख्त कर दिए गए हैं।
आवेदकों को सैलरी स्लिप, पेंशन स्लिप या आयकर रिटर्न जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे।
इससे नौकरीपेशा और अन्य वर्ग के लोगों के लिए प्रक्रिया थोड़ी कठिन हो गई है।
निवास प्रमाण पत्र के लिए बढ़ी शर्तें
निवास प्रमाण पत्र के लिए अब कई दस्तावेजों का होना जरूरी है।
इनमें खतियान, राशन कार्ड, वोटर आईडी, बिजली बिल, टेलीफोन बिल और आधार कार्ड शामिल हैं।
इनमें से आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया अब पूरी तरह मुफ्त
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरटीपीएस के तहत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आवेदन पूरी तरह मुफ्त रहेगा और तय समय सीमा के अंदर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
इसके अलावा, आवेदक अपनी मूल प्रति भी बिना किसी शुल्क के प्राप्त कर सकेंगे।
छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
इन नए नियमों का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ रहा है।
कॉलेज एडमिशन, स्कॉलरशिप और अन्य जरूरी कार्यों के लिए समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिलने से उन्हें परेशानी हो रही है।
कई छात्रों को बार-बार आवेदन करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
पारदर्शिता बनाम व्यवहारिक चुनौती
सरकार का कहना है कि नए नियमों से फर्जी प्रमाण पत्र पर रोक लगेगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
हालांकि, आम लोगों का मानना है कि अचानक बदलाव से उन्हें तैयारी का समय नहीं मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत है।
निष्कर्ष: जागरूकता और तैयारी जरूरी
कुल मिलाकर, बिहार में प्रमाण पत्र बनाने के नए नियमों ने प्रक्रिया को सख्त बना दिया है।
अब आवेदकों को पहले से ज्यादा तैयारी और दस्तावेज जुटाने की जरूरत होगी।
समय पर प्रमाण पत्र पाने के लिए सही जानकारी और पूरे दस्तावेज के साथ आवेदन करना बेहद जरूरी है।
Source: प्रशासनिक निर्देश व स्थानीय रिपोर्ट्स
