
होर्मुज में बड़ा अपडेट: 10 दिन में 14 जहाजों पर हमला, तेल मार्ग ठप
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच Strait of Hormuz में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। 1 मार्च से 11 मार्च 2026 के बीच इस अहम समुद्री मार्ग में 14 जहाजों पर हमले हुए हैं। ये हमले मिसाइल, ड्रोन और रिमोट कंट्रोल बोट से किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई तेल टैंकर और कंटेनर जहाजों को निशाना बनाया गया, जिसके कारण Strait of Hormuz से गुजरने वाला वैश्विक तेल व्यापार लगभग ठप हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है।
अनुमान है कि दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से जाता है।
ऐसे में यहां अस्थिरता बढ़ने का मतलब है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तुरंत हलचल शुरू हो जाती है।
इसी वजह से हाल के हमलों के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से जहाज भेजने पर रोक लगा दी है।
इस फैसले से दुनिया भर के बाजारों में तेल कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
1 मार्च: जंग शुरू होते ही तीन बड़े हमले
28 फरवरी को क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद 1 मार्च को तीन बड़े हमले हुए।
- ओमान के तट से करीब 50 समुद्री मील दूर MKD VYOM टैंकर पर हमला हुआ। इसमें एक क्रू मेंबर की मौत हो गई।
- यूएई के रास अल खैमाह के पास Hercules Star नाम के तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई।
- ओमान के पास Skylight नाम के टैंकर को भी निशाना बनाया गया। बाद में चालक दल को सुरक्षित निकाला गया।
इन शुरुआती हमलों ने ही पूरे क्षेत्र में शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ा दी।
2 से 6 मार्च: मिसाइल और रिमोट बोट से हमले
2 मार्च को बहरीन के पास अमेरिकी झंडे वाले टैंकर Stena Imperative पर दो मिसाइलें दागी गईं।
हमले के बाद जहाज में आग लग गई और चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा।
3 मार्च को यूएई के फुजैरा बंदरगाह के पास दो क्रूड ऑयल टैंकरों पर हमला हुआ।
इनमें Libra Trader और Gold Oak शामिल थे, जिन्हें मामूली नुकसान हुआ।
4 मार्च को माल्टा के झंडे वाला कंटेनर जहाज Safin Prestige होर्मुज की ओर बढ़ रहा था, तभी उस पर मिसाइल हमला हुआ।
इससे इंजन रूम में आग लग गई।
5 मार्च को एक और चौंकाने वाला हमला हुआ, जब विस्फोटकों से भरी रिमोट कंट्रोल बोट से तेल टैंकर को निशाना बनाया गया।
6 मार्च को ओमान के पास एक टगबोट पर हमला हुआ, जो पहले हुए हमले में क्षतिग्रस्त जहाज की मरम्मत कर रही थी।
7 मार्च: ड्रोन अटैक से बढ़ी चिंता
7 मार्च को सऊदी अरब के जुबैल के पास एक जहाज पर संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार हमले के बाद जहाज के अधिकांश चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन और रिमोट बोट जैसे नए तरीकों के इस्तेमाल ने समुद्री सुरक्षा को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
11 मार्च: एक ही दिन में तीन जहाज निशाने पर
11 मार्च को हालात और गंभीर हो गए जब एक ही दिन में तीन जहाजों पर हमले हुए।
- थाईलैंड के Mayuri Naree जहाज पर प्रोजेक्टाइल हमला हुआ, जिससे आग लग गई। यह जहाज भारत के कांडला बंदरगाह की ओर आ रहा था।
- यूएई के पास जापान के कंटेनर शिप One Majesty पर हमला हुआ।
- दुबई के तट से करीब 50 मील दूर Star Gwyneth जहाज को भी नुकसान पहुंचा।
हालांकि इन घटनाओं में अधिकांश क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं।
भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है
Strait of Hormuz में बढ़ते हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
- तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है
- शिपिंग लागत बढ़ सकती है
- सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
भारत के लिए यह मार्ग खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति इसी रास्ते से आती है।
इस संकट का असर आम लोगों तक भी पहुंच सकता है।
यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो पेट्रोल-डीजल, परिवहन और कई जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हमले जारी रहे तो कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां लंबे समय तक इस मार्ग से दूरी बना सकती हैं।
ऐसी स्थिति में दुनिया को तेल सप्लाई के वैकल्पिक रास्ते खोजने पड़ सकते हैं।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
Source: Reuters, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा रिपोर्ट