जमीन के बदले नौकरी केस में लालू यादव को राहत, HC का नोटिस
पटना/नई दिल्ली: जमीन के बदले नौकरी केस में Lalu Prasad Yadav को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बुधवार को Delhi High Court ने जमीन के बदले नौकरी केस में उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) को नोटिस जारी किया। यह मामला कथित तौर पर रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लेने से जुड़ा है। जमीन के बदले नौकरी केस में लालू यादव ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। अदालत ने मामले में CBI से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है।
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का बताया जाता है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उस दौरान रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन ली गई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI को जारी किया नोटिस
जमीन के बदले नौकरी केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई की। सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति Manoj Jain की एकल पीठ ने CBI से जवाब दाखिल करने को कहा।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च के लिए निर्धारित की है। अदालत के इस कदम को लालू यादव और उनके परिवार के लिए फिलहाल राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि अब CBI को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।
लालू यादव ने क्यों दायर की याचिका
लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।
जनवरी 2026 में Rouse Avenue Court के विशेष न्यायाधीश Vishal Gogne ने इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था।
अदालत ने उस समय कहा था कि प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला बनता है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए लालू यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया।
किन-किन लोगों पर लगे हैं आरोप
इस मामले में केवल लालू प्रसाद यादव ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम भी शामिल हैं।
आरोपितों में शामिल हैं:
- Rabri Devi – पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार
- Tejashwi Yadav – बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री
- Tej Pratap Yadav
- Misa Bharti
- हेमा यादव
निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ये सभी कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें रेलवे की नौकरियों को सौदेबाजी के साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया।
क्या है जमीन के बदले नौकरी का पूरा मामला
CBI के अनुसार यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि उस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी जैसी नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से जमीन ली गई। यह जमीन बाद में लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर की गई।
CBI का यह भी आरोप है कि कई मामलों में जमीन बाजार कीमत से काफी कम दरों पर ली गई और लेनदेन नकद में हुआ। जांच एजेंसी का मानना है कि इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के तत्व शामिल हैं।
कोर्ट ने पहले क्या टिप्पणी की थी
राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के आधार पर यह प्रतीत होता है कि आरोपियों ने कथित तौर पर एक आपराधिक गिरोह के रूप में काम किया।
अदालत के अनुसार रेलवे में सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर अचल संपत्ति हासिल करने की कोशिश की गई। इसी आधार पर अदालत ने आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
हालांकि यह केवल आरोप तय करने का चरण था और अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
लालू परिवार का क्या है पक्ष
इस पूरे मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और उन्होंने कोई अवैध काम नहीं किया।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट में पेशी के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने कहा कि वे अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत मुकदमे का सामना करेंगे और तथ्यों के आधार पर अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
लालू परिवार का कहना है कि जांच एजेंसी के आरोप निराधार हैं और अदालत में सच सामने आएगा।
आगे क्या होगा
अब दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। इस दौरान CBI को अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा।
अदालत के फैसले के बाद ही यह तय होगा कि निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को बरकरार रखा जाएगा या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा।
फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने को इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी जगत की नजर बनी हुई है।
Source: एजेंसी रिपोर्ट / कोर्ट कार्यवाही