शेयर बाजार में बड़ा झटका: सेंसेक्स 1800 अंक टूटा, रुपया रिकॉर्ड गिरावट पर


शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: क्या, कब, क्यों?

शेयर बाजार में गिरावट सोमवार, 23 मार्च को देखने को मिली जब भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारी गिरावट के साथ खुला। शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बताया जा रहा है। इस गिरावट का असर मुंबई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज दोनों पर साफ दिखा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह टूट गए।


सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 1800 अंक गिरकर 72,732.54 पर पहुंच गया। यह लगभग 2.42% की गिरावट है, जो निवेशकों के लिए बड़ा झटका है।

वहीं, एनएसई निफ्टी भी 574 अंक लुढ़ककर 22,540.15 पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि अधिकांश सेक्टर लाल निशान में नजर आए।

छोटे और मिडकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई, जिससे रिटेल निवेशकों को ज्यादा नुकसान हुआ।


निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपये डूबे

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 13 लाख करोड़ रुपये घटकर 416 लाख करोड़ रुपये रह गया।

इसका मतलब है कि कुछ ही घंटों में निवेशकों की भारी पूंजी बाजार से साफ हो गई।

इस फैसले से लोगों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है, खासकर उन निवेशकों को जो हाल ही में बाजार में आए थे।


मिडिल ईस्ट तनाव बना सबसे बड़ा कारण

ग्लोबल स्तर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर एशियाई बाजारों पर पहले ही दिख चुका है और अब भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • युद्ध या तनाव की स्थिति में विदेशी निवेशक जोखिम कम करते हैं
  • सुरक्षित निवेश की ओर रुख बढ़ता है
  • शेयर बाजार में बिकवाली तेज हो जाती है


रुपया पहली बार 93.90 के पार

शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ गया है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 93.90 के पार पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

सुबह के कारोबार में रुपया करीब 93.83 प्रति डॉलर पर ट्रेड करता दिखा।

पिछले सत्र में भी रुपया 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिसमें 64 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।


कच्चे तेल की कीमतों का असर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी इस गिरावट की बड़ी वजह बनी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से:

  • महंगाई बढ़ती है
  • कंपनियों का खर्च बढ़ता है
  • रुपया कमजोर होता है

इन सभी कारणों का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है।


आगे क्या करें निवेशक?

मौजूदा हालात में विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि:

  • घबराकर फैसले न लें
  • लॉन्ग टर्म निवेश पर ध्यान दें
  • मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश बनाए रखें

बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी है।


निष्कर्ष

शेयर बाजार में आई यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक तनाव और आर्थिक दबाव का नतीजा है। सेंसेक्स, निफ्टी और रुपया—तीनों पर इसका असर साफ दिख रहा है।

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।


Source: एजेंसी / मार्केट डेटा

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