
बिहार और झारखंड में चैती छठ 2026 की शुरुआत
चैती छठ 2026 की शुरुआत आज नहाय-खाय के साथ हो गई। बिहार और झारखंड में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे, जहां व्रतियों ने गंगा स्नान कर पूजा की। चैती छठ 2026 के पहले दिन व्रतियों ने पूजा सामग्री को शुद्ध किया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत का संकल्प लिया। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और सूर्य देव व छठी मैया की उपासना का महत्वपूर्ण अवसर होता है।
चैती छठ की शुरुआत से दिखा उत्साह
चैती छठ का पहला दिन “नहाय-खाय” बेहद खास माना जाता है। इस दिन व्रती सुबह-सुबह नदी या तालाब में स्नान करते हैं और घर को पूरी तरह शुद्ध करते हैं।
गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करती नजर आईं, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
गंगा स्नान और पूजा की खास परंपरा
नहाय-खाय के दिन व्रती गंगा स्नान कर पूजा के बर्तनों को गंगा जल और मिट्टी से शुद्ध करते हैं। इसके बाद वे पूजा का संकल्प लेते हैं।
इस दौरान सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं देती हैं। यह परंपरा आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।
श्रद्धालु गंगाजल को घर लेकर जाते हैं, जिसका उपयोग पूरे व्रत के दौरान पूजा में किया जाता है।
कद्दू-भात बनेगा महाप्रसाद
नहाय-खाय के दिन व्रती केवल शुद्ध और सात्विक भोजन करते हैं। इस दिन कद्दू-भात (कद्दू और चावल) का विशेष महत्व होता है।
इसे महाप्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है और पूरे परिवार के साथ ग्रहण किया जाता है।
यह भोजन शुद्धता और संयम का प्रतीक है, जो पूरे व्रत के नियमों की शुरुआत को दर्शाता है।
चार दिनों तक चलता है पावन पर्व
चैती छठ चार दिनों तक चलने वाला पर्व है, जिसमें हर दिन का विशेष महत्व होता है:
- पहला दिन: नहाय-खाय
- दूसरा दिन: खरना (उपवास और गुड़-खीर प्रसाद)
- तीसरा दिन: अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य
- चौथा दिन: उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
अस्त होते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना इस पर्व की सबसे अहम परंपरा है, जो प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।
आस्था, प्रकृति और अनुशासन का पर्व
छठ पर्व को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। यह केवल पूजा नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
इस दौरान व्रती कठिन नियमों का पालन करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करते हैं।
आम लोगों पर क्या असर?
इस पर्व के दौरान समाज में एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिलती है।
इस फैसले से लोगों को अपने परिवार के साथ समय बिताने, मानसिक शांति पाने और प्रकृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
साफ-सफाई, शुद्ध भोजन और अनुशासन का संदेश समाज में जागरूकता बढ़ाता है, जो आज के समय में बेहद जरूरी है।
देशभर में दिखी छठ की झलक
हालांकि छठ पर्व की सबसे ज्यादा धूम बिहार और झारखंड में होती है, लेकिन अब यह पूरे देश में मनाया जाने लगा है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य शहरों में भी लोग पूरे विधि-विधान से इस पर्व को मनाते हैं।
यह पर्व प्रवासी भारतीयों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
निष्कर्ष
चैती छठ 2026 की शुरुआत के साथ ही आस्था, श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है।
Source: स्थानीय श्रद्धालु एवं परंपरागत धार्मिक मान्यताएं