अहम खबर: सम्राट चौधरी का ममता बनर्जी पर हमला, राष्ट्रपति अपमान का आरोप

 


अहम खबर: सम्राट चौधरी का ममता बनर्जी पर हमला, राष्ट्रपति अपमान का आरोप

Bihar News में एक बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान का आरोप लगाया है। यह बयान पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया गया। Bihar News के इस राजनीतिक विवाद में सम्राट चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी का व्यवहार आदिवासी समाज के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब चुनाव में मिल सकता है।

यह विवाद उस कार्यक्रम को लेकर सामने आया है जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सिलीगुड़ी में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था।


सम्राट चौधरी ने क्या लगाया आरोप

पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए सम्राट चौधरी ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राष्ट्रपति का ही नहीं बल्कि एक आदिवासी बहन के सम्मान का भी सवाल है।

सम्राट चौधरी के मुताबिक, जिस तरह की स्थिति कार्यक्रम के दौरान बनी, उससे राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंची है।

उन्होंने कहा कि यह घटना आदिवासी समाज के सम्मान से भी जुड़ी हुई है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि जनता इस पूरे मामले को ध्यान से देख रही है।


जनता चुनाव में देगी जवाब: सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी ने अपने बयान में राजनीतिक संकेत भी दिए।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगी।

उनके अनुसार, आने वाले समय में जनता चुनाव के माध्यम से इसका जवाब दे सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगले कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय सामने आ रही है।


ममता बनर्जी कार्यालय की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यालय की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि जिस कार्यक्रम की बात हो रही है, वह इंटरनेशनल संताल काउंसिल नामक एक निजी संगठन द्वारा आयोजित किया गया था।

इस संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सिलीगुड़ी में आयोजित 9वें इंटरनेशनल आदिवासी संताल सम्मेलन में आमंत्रित किया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, कार्यक्रम से पहले प्रशासन ने सुरक्षा और तैयारियों को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई थीं।


प्रशासन ने तैयारियों को लेकर जताई थी चिंता

ममता बनर्जी कार्यालय के बयान में कहा गया कि कार्यक्रम से पहले एडवांस्ड सिक्योरिटी लायजन प्रक्रिया के तहत स्थिति की समीक्षा की गई थी।

जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति सचिवालय को लिखित रूप में बताया था कि कार्यक्रम के आयोजक पर्याप्त तैयारी में सक्षम नहीं दिख रहे हैं।

यह जानकारी टेलीफोन के माध्यम से भी साझा की गई थी।

इसके बावजूद कार्यक्रम तय समय के अनुसार जारी रहा।

बयान में यह भी कहा गया कि इस संबंध में दस्तावेज और तस्वीरें सार्वजनिक की गई हैं।


राष्ट्रपति सचिवालय की टीम ने किया था दौरा

मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में आगे बताया कि राष्ट्रपति सचिवालय की एडवांस टीम ने 5 मार्च 2026 को कार्यक्रम स्थल का दौरा किया था।

टीम ने मौके पर जाकर तैयारियों की स्थिति का आकलन किया।

बयान के अनुसार, टीम को भी वहां कुछ कमियां दिखाई दी थीं।

इसके बावजूद कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया गया।

इस दौरान राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई की प्रक्रिया भी पहले से तय प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की गई।


स्वागत और विदाई प्रोटोकॉल के अनुसार हुई

मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की थी।

सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर, दार्जिलिंग के जिलाधिकारी और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त ने राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई की।

यह सब पहले से तय और स्वीकृत प्रोटोकॉल के अनुसार हुआ था।

बयान में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार्यक्रम के स्वागत लाइनअप या मंच की योजना का हिस्सा नहीं थीं।

इसलिए प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की प्रोटोकॉल चूक नहीं हुई।


राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

एक तरफ भाजपा के नेता इसे राष्ट्रपति और आदिवासी समाज के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।

दूसरी ओर ममता बनर्जी कार्यालय ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है।

उनका कहना है कि देश के सर्वोच्च पद को राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर आने वाले समय में राजनीतिक बयानबाजी में भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के साथ इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख बनाए हुए हैं।


Source: एएनआई / मीडिया रिपोर्ट

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