संसद में गूंजी किसानों की आवाज, Pappu Yadav की बड़ी मांग

 


संसद में किसानों की आवाज, उठी बड़ी मांग

किसानों की समस्या को लेकर संसद में जोरदार आवाज उठी। Pappu Yadav ने 19 मार्च 2026 को संसद में चर्चा के दौरान सीमांचल और कोसी क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने किसानों की समस्या के समाधान के लिए कोसी-मेची लिंक परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा देने, हर पंचायत में माइक्रो इरिगेशन लागू करने और मक्का खरीद केंद्र खोलने की मांग की।

उन्होंने यह मुद्दे इसलिए उठाए क्योंकि क्षेत्र के किसान बाढ़, सूखा, बाजार की कमी और सरकारी समर्थन के अभाव जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

कोसी-मेची लिंक परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग

सांसद ने सबसे पहले कोसी-मेची लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लिए “जीवनरेखा” साबित हो सकती है। हर साल बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेल रहे किसानों के लिए यह योजना स्थायी समाधान दे सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा मिलता है, तो इसके लिए अधिक फंड और तेज गति से काम संभव हो सकेगा।

हर पंचायत में माइक्रो इरिगेशन पर जोर

पप्पू यादव ने किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा देने के लिए हर पंचायत में माइक्रो इरिगेशन को अनिवार्य करने की मांग रखी।

उन्होंने कहा कि सिंचाई की बेहतर व्यवस्था से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा।

यह पहल खासकर उन क्षेत्रों के लिए अहम है जहां बारिश पर निर्भर खेती होती है और पानी की उपलब्धता अनिश्चित रहती है।

मक्का खरीद केंद्र खोलने की उठी मांग

सीमांचल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मक्का उत्पादन होता है, लेकिन किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

इसी मुद्दे को उठाते हुए सांसद ने

  • पूर्णिया
  • कटिहार
  • किशनगंज

में एफसीआई के मक्का खरीद केंद्र खोलने की मांग की।

उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद व्यवस्था नहीं होने से किसान मजबूरी में अपनी उपज कम कीमत पर बेच देते हैं, जिससे उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ नहीं मिल पाता।

फसल बीमा और कर्ज व्यवस्था पर भी उठे सवाल

पप्पू यादव ने फसल बीमा योजना और कर्ज वितरण में हो रही अनियमितताओं को भी संसद में उठाया।

उन्होंने कहा कि

  • किसानों को बीमा क्लेम समय पर नहीं मिलता
  • बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है

उन्होंने मांग की कि फसल बीमा योजना को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।

इसके साथ ही सीमांचल और कोसी क्षेत्र के किसानों के लिए विशेष क्रेडिट पैकेज लागू करने की भी जरूरत बताई।

जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चिंता

सांसद ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर भी ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं, लेकिन बजट में इसके लिए ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं।

उन्होंने इस क्षेत्र को “जलवायु संवेदनशील जोन” घोषित करने और इसके लिए विशेष मिशन लागू करने की मांग की।

किसानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण सुझाव

पप्पू यादव ने कृषि सुधार के लिए कई अन्य सुझाव भी दिए, जिनमें शामिल हैं:

  • उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना
  • ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना
  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना

उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को सही मूल्य, संसाधन और समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक कृषि क्षेत्र का संतुलित विकास संभव नहीं है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि सीमांचल और कोसी क्षेत्र देश के उन इलाकों में आते हैं जहां किसान प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक चुनौतियों से लगातार जूझते हैं।

संसद में इन मुद्दों को उठाने से सरकार का ध्यान इन समस्याओं की ओर जा सकता है और आने वाले समय में नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल क्षेत्रीय किसानों के लिए राहत का रास्ता खोल सकती है, यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है।

आगे क्या हो सकता है?

अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है।

यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो

  • सिंचाई व्यवस्था में सुधार
  • किसानों की आय में वृद्धि
  • कृषि ढांचे में मजबूती

जैसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

हालांकि फिलहाल यह मुद्दा संसद में उठाया गया है और आगे की कार्रवाई सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।


Source: संसद में कृषि चर्चा के दौरान सांसद का बयान

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