बड़ा अपडेट: CM पद छोड़ राज्यसभा क्यों जा रहे नीतीश कुमार? जानें वजह

 


बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं और इसे उनकी राजनीतिक यात्रा का नया चरण माना जा रहा है। नीतीश कुमार राज्यसभा जाने की तैयारी क्यों कर रहे हैं, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 75 वर्षीय नेता अब कम सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। साथ ही पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को भी इस फैसले से जोड़ा जा रहा है। अगर यह फैसला अंतिम रूप लेता है, तो बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

पिछले करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का प्रभाव लगातार बना रहा है।


दो दशक से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश

साल 2005 से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक केंद्रीय चेहरा रहे हैं। इस दौरान राज्य में कई राजनीतिक बदलाव हुए, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अधिकतर समय वही बने रहे।

गठबंधन बदलने, चुनावी उतार-चढ़ाव और राजनीतिक समीकरणों के बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी।

इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक सुधार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया। यही वजह है कि लंबे समय तक वे राज्य की राजनीति के केंद्र में बने रहे।


2020 चुनाव के बाद भी क्यों बने रहे मुख्यमंत्री?

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

सीटों के लिहाज से भाजपा के पास ज्यादा विधायक थे, लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार के पास ही रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे दो मुख्य कारण माने जाते हैं।

पहला कारण उनका मजबूत सामाजिक आधार है। नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिला मतदाताओं के बीच मजबूत समर्थन तैयार किया है।

शराबबंदी और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें भरोसेमंद नेता की छवि दी। यह वोट बैंक गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।


गठबंधन की राजनीति में भरोसे का फैक्टर

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने रहने के पीछे दूसरा बड़ा कारण गठबंधन की राजनीति में भरोसा माना जाता है।

2020 चुनाव के बाद भाजपा नेतृत्व ने साफ कहा था कि मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार के पास ही रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से भी यह संकेत दिया गया था कि गठबंधन की प्रतिबद्धता निभाई जाएगी।

इस फैसले को राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन की स्थिरता का संदेश भी माना गया।


स्वास्थ्य और कम सक्रिय भूमिका की इच्छा

रिपोर्ट्स के अनुसार नीतीश कुमार की उम्र अब 75 साल हो चुकी है। ऐसे में वे अपेक्षाकृत कम सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री पद काफी व्यस्त और जिम्मेदारी वाला पद होता है। लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहना पड़ता है।

ऐसे में राज्यसभा का मंच उन्हें अपेक्षाकृत संतुलित और कम व्यस्त राजनीतिक भूमिका दे सकता है।


JDU में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी?

राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार का यह कदम जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में उनके बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की संभावना भी चर्चा में है।

यदि ऐसा होता है, तो पार्टी के भीतर नेतृत्व का बदलाव धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।

हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।


विपक्ष क्या कह रहा है?

विपक्षी दल इस फैसले को अलग नजरिए से देख रहे हैं।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दावा है कि भाजपा धीरे-धीरे नीतीश कुमार को किनारे कर रही है।

हालांकि एनडीए के नेताओं की ओर से इस तरह के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।


क्या BJP को मिलेगा अपना मुख्यमंत्री?

राजनीतिक गलियारों में एक और संभावना पर चर्चा हो रही है।

यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिल सकता है।

क्योंकि पिछले चुनावों के बाद गठबंधन में भाजपा की राजनीतिक ताकत काफी बढ़ गई है।

हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।


नीतीश की राजनीतिक यात्रा का नया अध्याय

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना सिर्फ पद का बदलाव नहीं माना जा रहा।

इसे लगभग पांच दशक लंबी राजनीतिक यात्रा के नए चरण के रूप में भी देखा जा रहा है।

वे पहले ही बिहार विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं।

अगर वे राज्यसभा में जाते हैं, तो यह उनके राजनीतिक अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने का एक नया अवसर हो सकता है।

कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में उन्हें केंद्र सरकार में भी कोई अहम भूमिका मिल सकती है।


आगे क्या होगा?

फिलहाल बिहार की राजनीति में इस फैसले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

आने वाले दिनों में जेडीयू और एनडीए की रणनीति इस सवाल का जवाब तय कर सकती है।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स / राजनीतिक विश्लेषण

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