नीतीश कुमार जन्मदिन पर बड़ा अपडेट, 51 लाख आंगनबाड़ी बच्चों को दो सेट मुफ्त पोशाक देने की शुरुआत

 


बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के जन्मदिन पर आज बड़ा सामाजिक कदम उठाया गया। क्या हुआ? 51 लाख आंगनबाड़ी बच्चों को दो-दो सेट मुफ्त पोशाक देने की योजना शुरू हुई। कब? आज जन्मदिन के मौके पर। कहां? पश्चिम चंपारण और बगहा से राज्यव्यापी शुरुआत। किसने? ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने शुभारंभ किया। क्यों? बच्चों में समानता और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए। कैसे? जीविका दीदियों द्वारा तैयार पोशाकों के वितरण से। नीतीश कुमार जन्मदिन के अवसर पर शुरू हुई यह पहल नीतीश कुमार जन्मदिन को सामाजिक सरोकार से जोड़ती है।

राज्य सरकार के अनुसार पहले चरण में करीब 51 लाख बच्चों तक यह लाभ पहुंचेगा। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर चरणबद्ध तरीके से ड्रेस वितरित की जाएगी।


पश्चिम चंपारण और बगहा से अभियान की शुरुआत

इस वितरण अभियान की औपचारिक शुरुआत पश्चिम चंपारण और बगहा से की गई। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह सिर्फ कपड़ा वितरण नहीं, बल्कि सम्मान और समान अवसर का संदेश है।

कार्यक्रम राज्य स्तर पर आयोजित हुआ, जहां से अन्य जिलों में भी प्रक्रिया तेज की जाएगी। विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध वितरण के निर्देश दिए गए हैं।


51 लाख बच्चों को दो सेट पोशाक

योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को दो सेट ड्रेस दिए जाएंगे। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों को नियमित और एकरूप पोशाक मिल सकेगी।

सरकार का मानना है कि एक समान पोशाक से बच्चों में भेदभाव की भावना कम होगी। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

यह पहल भविष्य की पीढ़ी को बेहतर शुरुआत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


जीविका दीदियों को मिला रोजगार का अवसर

इन पोशाकों को स्थानीय ‘जीविका दीदियों’ ने तैयार किया है। राज्य में 1050 से अधिक सिलाई केंद्रों के माध्यम से लगभग एक लाख महिलाएं आजीविका से जुड़ी हैं।

वर्ष 2022 में मुंगेर से शुरू हुआ पहला दीदी सिलाई केंद्र अब 15 जिलों में 25 आधुनिक उत्पादन-सह-प्रशिक्षण केंद्रों तक विस्तार पा चुका है।

इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

आत्मविश्वास और समानता का संदेश

मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र बिहार की पहली पाठशाला हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह पोशाक सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का प्रतीक है।

सरकार का फोकस है कि प्रारंभिक शिक्षा से ही बच्चों को सम्मानजनक माहौल मिले। पोशाक के माध्यम से समानता का भाव विकसित करने की कोशिश की जा रही है।


छात्र जीवन में सिनेमा प्रेमी रहे नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर उनके छात्र जीवन की चर्चाएं भी सामने आईं। बताया जाता है कि वे कॉलेज के दिनों में सिनेमा देखने के शौकीन थे।

पटना के गांधी मैदान के पास स्थित फ्लोरा फाउंटेन उनका पसंदीदा अड्डा माना जाता था। दोस्तों के साथ वे यहां नाश्ता और चर्चा के लिए जाया करते थे।

कहा जाता है कि वे कई बार लगातार फिल्में भी देखते थे, खासकर देवानंद और दिलीप कुमार की फिल्में। बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने रिक्शा से जाकर फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ भी देखी थी।


लोहिया विचारों से प्रभावित

छात्र जीवन के दौरान वे राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़े। समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने सक्रिय भागीदारी शुरू की।

जेपी आंदोलन के दौरान वे संचालन समिति के सदस्य बने और विश्वविद्यालय स्तर की गतिविधियों में नेतृत्व किया।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत संघर्षपूर्ण रही, लेकिन आज वे बिहार की राजनीति के केंद्रीय चेहरों में गिने जाते हैं।

नीतीश कुमार के जन्मदिन पर शुरू हुई यह योजना बच्चों के भविष्य और महिलाओं के सशक्तिकरण को जोड़ती है। 51 लाख बच्चों तक ड्रेस पहुंचाना प्रशासनिक रूप से बड़ी जिम्मेदारी है, जिसकी निगरानी राज्य स्तर से की जाएगी।

यह पहल सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और महिला रोजगार—तीनों मोर्चों पर असर डालने की क्षमता रखती है।


Source: राज्य ग्रामीण विकास विभाग, आधिकारिक बयान

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