
भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। LPG जहाज ‘जग वसंत’ 16 हजार मीट्रिक टन गैस लेकर 27 मार्च 2026 को गुजरात के वाडीनगर बंदरगाह पहुंच गया। यह आपूर्ति भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम मानी जा रही है। इस ऑपरेशन में संबंधित पोर्ट अथॉरिटी और शिपिंग कंपनियां शामिल हैं। खास बात यह है कि LPG सप्लाई को बनाए रखने के लिए यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
वाडीनगर पोर्ट पर शुरू हुआ ट्रांसफर ऑपरेशन
गुजरात के वाडीनगर बंदरगाह पर पहुंचा ‘जग वसंत’ जहाज फिलहाल लंगर डाले खड़ा है। जल्द ही इसमें मौजूद LPG को दूसरे जहाज ‘एमटी रोज’ में ट्रांसफर किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, 1 हजार मीट्रिक टन LPG ट्रांसफर करने में करीब 1 घंटा लगता है। ऐसे में पूरे 16 हजार टन स्टॉक को स्थानांतरित करने में 16 से 18 घंटे का समय लगेगा।
यह पूरा ऑपरेशन गहरे समुद्र में किया जा रहा है, जिससे इसकी तकनीकी जटिलता और बढ़ जाती है।
पहले भी पहुंचे थे बड़े LPG शिपमेंट
इससे पहले भारत को LPG सप्लाई में राहत देने के लिए ‘एमटी शिवालिक’ और ‘एमटी नंदा देवी’ जैसे बड़े जहाज भी देश के तट पर पहुंच चुके हैं।
इन जहाजों के जरिए करीब 92,712 टन LPG भारत लाई गई थी। यह मात्रा देश की लगभग एक दिन की घरेलू गैस खपत के बराबर मानी जाती है।
लगातार आ रहे इन शिपमेंट्स से साफ है कि सरकार और एजेंसियां सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय हैं।
मिडिल ईस्ट संकट का असर और भारत की रणनीति
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की असुरक्षा ने वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को प्रभावित किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 500 टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और रसायन ले जाने वाले जहाज शामिल हैं।
ऐसी स्थिति में भारत ने वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आयात बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। रूस, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों से सप्लाई को आंशिक रूप से बढ़ाया गया है।
भारत की LPG निर्भरता कितनी है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है:
- कच्चा तेल: लगभग 88% आयात
- प्राकृतिक गैस: करीब 50% आयात
- LPG: लगभग 60% आयात
खास बात यह है कि भारत की 85–95% LPG सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आती है।
ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे आम लोगों की रसोई पर असर डाल सकती है।
आम लोगों के लिए क्यों अहम है यह खबर?
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।
इस फैसले से लोगों को राहत मिल सकती है, क्योंकि LPG की उपलब्धता बनी रहने से सिलेंडर की कमी या कीमतों में अचानक उछाल का खतरा कम हो जाता है।
घरेलू उपयोग के अलावा, होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग भी LPG पर निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई स्थिर रहना आर्थिक गतिविधियों के लिए भी जरूरी है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है, तो भारत को दीर्घकालिक रणनीति पर और जोर देना होगा।
इसमें वैकल्पिक सप्लाई रूट, स्टोरेज क्षमता बढ़ाना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना शामिल हो सकता है।
फिलहाल, ‘जग वसंत’ जैसे शिपमेंट्स देश के लिए राहत की सांस लेकर आए हैं।
Source: NDTV (रिपोर्ट: सौरभ वक्तानिया, एडिट: तिलकराज)