हिंद देश का प्यारा झंडा: गीत, अर्थ और रचनाकार का परिचय

🇮🇳 हिंद देश का प्यारा झंडा 🇮🇳

हिंद देश का प्यारा झंडा ऊँचा सदा रहेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा, ऊँचा सदा रहेगा !!

शान हमारी यह झंडा है यह अरमान हमारा,
यह बालपौरूश है सदियों का, यह बलिदान हमारा,
जहाँ जहाँ यह जाए झंडा यह संदेश सुनाए,
है आज़ाद हिंद यह दुनिया को आज़ाद करेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा !!

केसरिया बल भरने वाला सदा है सच्चाई,
हरा रंग है हरी हमारी, धरती की अंगराए,
कहता है यह चक्र हमारा, क़दम ना कहीं रूकेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा,
हिंद देश का प्यारा झंडा, ऊँचा सदा रहेगा !!

नही चाहते हम दुनिया मे अपना राज ज़माना,
नही चाहते औरों के मुँह की रोटी खा जाना,
सत्य न्याय के लिए हमारा लोहू सदा बहेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा, ऊँचा सदा रहेगा !!

हम कितने सुख सपने लेकर इसको फहराते है,
इस झंडे पर मर मिटने की कसम सभी खाते है,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा,
हिंद देश का प्यारा झंडा ऊँचा सदा रहेगा !!

जय हिंद 🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳

📜 संयुक्त संक्षिप्त सारांश

“हिंद देश का प्यारा झंडा” एक प्रेरणादायक देशभक्ति गीत है, जिसके रचनाकार श्यामलाल गुप्ता 'पार्षद' हैं। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लिखा गया था, जब देश में राष्ट्रप्रेम और आजादी की भावना प्रबल थी।

गीत में भारतीय तिरंगे के तीनों रंगों — केसरिया (साहस और त्याग), सफेद (शांति और सत्य) तथा हरा (समृद्धि) — के महत्व को सुंदर रूप से समझाया गया है। साथ ही नीले अशोक चक्र को निरंतर प्रगति और आगे बढ़ने का प्रतीक बताया गया है।

इस गीत का मुख्य संदेश है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज सदैव ऊँचा, सम्मानित और गौरवशाली रहेगा, और हर भारतीय को देश के प्रति प्रेम व समर्पण बनाए रखना चाहिए। 🇮🇳
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