बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर पढ़ाई शुरू होगी, सिलेबस बदला

 


बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर पढ़ाई शुरू होगी

बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर पढ़ाई को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर पढ़ाई 1 अप्रैल 2026 से कक्षा 6 से 8 तक लागू होगी। यह निर्णय State Council of Educational Research and Training द्वारा लिया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे तकनीकी शिक्षा में प्राइवेट स्कूलों के छात्रों के बराबर आ सकें।

नई व्यवस्था के तहत बच्चों को कंप्यूटर की बेसिक से लेकर आधुनिक तकनीकों तक की जानकारी दी जाएगी।

नया सिलेबस: क्या-क्या सीखेंगे छात्र?

नया कंप्यूटर सिलेबस पूरी तरह व्यावहारिक और आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

इसमें छात्रों को सिखाया जाएगा:

  • कंप्यूटर के भाग और उनकी कार्यप्रणाली
  • ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग
  • मल्टीटास्किंग और यूजर इंटरफेस
  • बेसिक डिजिटल ऑपरेशन

इसके अलावा, बच्चों को ‘साइबर अपराध’ से बचाव और ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ जैसी आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दी जाएगी।

इससे छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में तकनीक का सही उपयोग करना भी सीखेंगे।

गांव-गांव के बच्चों को मिलेगा डिजिटल अवसर

अब तक सरकारी स्कूलों के छात्र कंप्यूटर शिक्षा में पीछे रह जाते थे, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

इस नई पहल से गांव-गांव के बच्चे भी माउस और कीबोर्ड पर काम करना सीखेंगे। इससे डिजिटल गैप कम होगा और सभी छात्रों को समान अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार के शिक्षा सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

शिक्षकों को दिए गए विशेष निर्देश

इस नए सिलेबस को लागू करने से पहले शिक्षकों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

National Council of Educational Research and Training ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि छात्रों की ‘बेसिक लर्निंग’ को मजबूत किया जाए।

शिक्षकों से कहा गया है कि वे छात्रों को इस तरह तैयार करें कि उन्हें नई तकनीकी पढ़ाई समझने में कोई कठिनाई न हो।

यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि छात्र धीरे-धीरे और सहज तरीके से डिजिटल शिक्षा को अपनाएं।

किताबें और तैयारी लगभग पूरी

राज्य स्तर पर इस योजना को लागू करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।

जिलों में नई किताबें भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और स्कूलों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में यह सिलेबस बिना किसी बाधा के लागू हो जाए।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दौर में डिजिटल शिक्षा बेहद जरूरी हो गई है।

अगर बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही कंप्यूटर की जानकारी मिलती है, तो वे भविष्य में तकनीकी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

इसके साथ ही यह कदम सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच के अंतर को कम करने में भी मदद करेगा।

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

बिहार सरकार अब पारंपरिक ‘रट्टा मार’ पढ़ाई से हटकर व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित शिक्षा पर जोर दे रही है।

कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना सकता है।

इससे छात्रों की सोच, समझ और कौशल में सुधार होगा, जो उन्हें डिजिटल युग में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

आगे क्या होगा?

आने वाले महीनों में इस योजना के प्रभाव का आकलन किया जाएगा।

अगर यह पहल सफल होती है, तो भविष्य में इसे अन्य कक्षाओं तक भी विस्तार दिया जा सकता है।

इसके साथ ही स्कूलों में कंप्यूटर लैब और डिजिटल संसाधनों को और मजबूत करने पर भी काम किया जा सकता है।


Source: SCERT बिहार और शिक्षा विभाग की जानकारी

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