
पटना में बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। क्या, कब, कहां, कौन और कैसे—इन सभी सवालों के केंद्र में चिराग पासवान और उनकी मां रीना पासवान हैं। 16 मार्च 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले बिहार की पांचवीं सीट पर घमासान दिख रहा है। बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए के सहयोगी दलों की नजरें इसी सीट पर टिकी हैं, क्योंकि जीत का गणित यहीं तय होगा।
इस बार अलग-अलग राज्यों की 72 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें बिहार की पांच सीटें शामिल हैं। राज्यसभा सांसद का चुनाव विधायक करते हैं और इसके लिए तय वोटों की जरूरत होती है।
बिहार की पांचवीं सीट पर क्यों मचा घमासान?
बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। विपक्ष के पास यह संख्या फिलहाल नहीं है।
एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। जेडीयू और बीजेपी के बाद तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी चिराग पासवान की है।
यही वजह है कि पांचवीं सीट पर उनका दावा मजबूत माना जा रहा है।
हालांकि, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा भी इस सीट पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
क्या रीना पासवान को मिल सकता है मौका?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर चिराग पासवान को राज्यसभा सीट मिलती है तो वे अपनी मां रीना पासवान को भेज सकते हैं।
हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अंदरखाने तैयारी पूरी है। अंतिम फैसला बीजेपी की हरी झंडी पर निर्भर करेगा।
इस संभावित कदम को भावनात्मक और रणनीतिक दोनों नजरिए से देखा जा रहा है। इससे पार्टी में पारिवारिक और सामाजिक संतुलन का संदेश जा सकता है।
2025 विधानसभा चुनाव का क्या है कनेक्शन?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान सीट शेयरिंग को लेकर चिराग पासवान की पार्टी 35 सीटों की मांग कर रही थी।
अंतिम दौर में सीटें घटाकर 29 कर दी गईं। इसके बावजूद पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की।
तब राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि राज्यसभा की एक सीट का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई।
अगर अब वह वादा पूरा होता है, तो यह चिराग पासवान के लिए बड़ी राजनीतिक राहत मानी जाएगी।
बीजेपी की रणनीति क्या कहती है?
बीजेपी की कोशिश रहती है कि कोई भी सहयोगी नाराज न हो। गठबंधन की राजनीति में संतुलन सबसे अहम होता है।
पांचवीं सीट का फैसला केवल एक उम्मीदवार तय नहीं करेगा, बल्कि आने वाले लोकसभा और विधानसभा समीकरण भी प्रभावित करेगा।
इस फैसले से लोगों को यह संदेश जाएगा कि एनडीए अपने सहयोगियों को सम्मान देता है या नहीं।
आम जनता पर क्या होगा असर?
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता के वोट से नहीं होते, लेकिन इसका असर व्यापक राजनीति पर पड़ता है।
अगर रीना पासवान की एंट्री होती है, तो यह सामाजिक समीकरणों में बदलाव का संकेत हो सकता है।
बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी और पारिवारिक नेतृत्व का मिश्रण देखने को मिल सकता है।
यह फैसला आगामी चुनावों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
आगे क्या?
16 मार्च 2026 को मतदान होना है। उससे पहले उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा होगी।
क्या चिराग पासवान अपनी मां को संसद भेजेंगे?
या फिर एनडीए किसी और समीकरण पर दांव खेलेगा?
फिलहाल बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट पर सस्पेंस बरकरार है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अंतिम समय तक समीकरण बदल सकते हैं।
Source: राजनीतिक सूत्रों और सार्वजनिक उपलब्ध जानकारी पर आधारित रिपोर्ट