बड़ा अपडेट: IGIMS में 1200 बेड अस्पताल तैयार, रोबोट करेगा सर्जरी

 


पटना स्थित Indira Gandhi Institute of Medical Sciences (IGIMS) में 1200 बेड का नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तेजी से तैयार हो रहा है। IGIMS नया अस्पताल दिसंबर 2026 तक मरीजों के लिए खोलने का लक्ष्य है। IGIMS नया अस्पताल सात मंजिला भवन में विकसित हो रहा है, जहां रोबोटिक सर्जरी और 164 बेड की इमरजेंसी यूनिट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। निदेशक प्रो. डॉ. बिंदे कुमार के अनुसार करीब 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम तेज गति से चल रहा है।

यह परियोजना न केवल पटना, बल्कि पूरे बिहार के गंभीर मरीजों के इलाज की दिशा बदल सकती है।


1200 बेड का सबसे आधुनिक अस्पताल भवन

IGIMS परिसर में बन रहा यह सात मंजिला मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल राज्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य ढांचों में शामिल होगा।

अस्पताल में कुल 1200 बेड की क्षमता होगी। इससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली या अन्य राज्यों में रेफर करने की जरूरत कम पड़ेगी।

मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की संख्या 12 से बढ़ाकर 14 कर दी गई है। साथ ही 92 बेड का अत्याधुनिक ICU बनाया जा रहा है।

इस विस्तार से हाई-रिस्क सर्जरी और क्रिटिकल केयर की क्षमता कई गुना बढ़ेगी।


ग्राउंड फ्लोर बनेगा 164 बेड का इमरजेंसी सुपर सेंटर

नए अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर 164 बेड की विशाल इमरजेंसी यूनिट स्थापित होगी।

यह यूनिट ट्रॉमा, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर मामलों के तत्काल इलाज के लिए डिजाइन की गई है।

यहीं छह ऑपरेशन थिएटर और सेंट्रल स्टरलाइजेशन सर्विस डिपार्टमेंट (CSSD) भी काम करेगा। इससे आपातकालीन सर्जरी एक ही स्थान पर संभव होगी।

आपात स्थिति में मरीजों को तेजी से ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।


रोबोटिक सर्जरी से बदलेगी इलाज की तस्वीर

इस अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत होगी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम दिल्ली में विशेष प्रशिक्षण ले रही है। अत्याधुनिक एआई आधारित रोबोटिक सिमुलेटर पर गायनी, प्रोस्टेट, पित्ताशय और जटिल सर्जरी का अभ्यास कराया जा रहा है।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद दो महीने के भीतर रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की योजना है।

रोबोटिक सर्जरी से कम चीरा, कम दर्द और जल्दी रिकवरी संभव होती है। इससे मरीजों को उच्च गुणवत्ता का इलाज अपने राज्य में ही मिल सकेगा।


हर मंजिल पर अलग सुपर स्पेशियलिटी

अस्पताल भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर फ्लोर पर अलग-अलग चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।

गैस्ट्रो, स्त्री रोग, शिशु रोग, मानसिक स्वास्थ्य, मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, स्पाइन और ऑर्थोपेडिक विभागों के लिए अलग वार्ड बनाए जा रहे हैं।

इससे मरीजों को एक ही परिसर में व्यापक और समन्वित इलाज मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार मल्टी-डिसिप्लिनरी सेटअप से जटिल मामलों में बेहतर निर्णय लेना आसान होगा।


मरीजों और परिवारों को क्या होगा फायदा?

अब तक गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़ी संख्या में मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे।

इस फैसले से लोगों को राहत मिलेगी क्योंकि आधुनिक इलाज की सुविधा राज्य के भीतर ही उपलब्ध होगी।

आपातकालीन सेवाओं के मजबूत होने से दुर्घटना या गंभीर बीमारी के मामलों में जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।

ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को भी राजधानी में उच्च स्तरीय सुविधा मिलेगी।


स्वास्थ्य ढांचे के लिए बड़ा कदम

बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजना अहम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 1200 बेड की अतिरिक्त क्षमता से सरकारी अस्पतालों पर दबाव कम होगा।

रोबोटिक सर्जरी जैसी तकनीक से IGIMS राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की श्रेणी में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अस्पताल शुरू हो जाता है, तो यह राज्य के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

दिसंबर 2026 तक संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। अब सभी की नजर निर्माण कार्य की गति और उपकरणों की स्थापना पर है।

IGIMS का यह नया अध्याय बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी और संरचनात्मक बदलाव की कहानी लिख सकता है।


Source: Indira Gandhi Institute of Medical Sciences प्रशासन द्वारा साझा जानकारी

और नया पुराने
हमसे जुड़ें
1

बड़ी खबर सबसे पहले पाएं!

देश, बिहार और नौकरी से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।

👉 अभी WhatsApp चैनल जॉइन करें
होम क्विज वीडियो नोट्स NCERT