पटना। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और जनअधिकार पार्टी के नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। शुक्रवार देर रात पटना पुलिस ने उन्हें 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उनके मंदिरी स्थित आवास पर पुलिस और समर्थकों के बीच करीब ढाई घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—
👉 क्या हाल ही में NEET छात्रा की मौत का मुद्दा उठाना पप्पू यादव को भारी पड़ गया?
👉 या फिर यह कार्रवाई सिर्फ कानून के तहत हुई?
आइए पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।
31 साल पुराने केस में गिरफ्तारी
पटना पुलिस के मुताबिक, पप्पू यादव की गिरफ्तारी 1995 में दर्ज एक मामले के तहत की गई है। यह केस गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें उन पर धोखाधड़ी और किराए की संपत्ति के दुरुपयोग के आरोप हैं।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
पुलिस ने बताया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की
धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120B के तहत दर्ज है।
पटना सिटी एसपी (सेंट्रल) भानु प्रताप सिंह ने कहा कि अदालत द्वारा बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद सांसद पेश नहीं हुए, जिसके बाद वारंट जारी हुआ और गिरफ्तारी की गई।
क्या है पूरा विवाद?
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल का आरोप है कि उनका मकान निजी उपयोग के नाम पर किराए पर लिया गया था, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक कार्यालय में बदल दिया गया। यह मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन है।
हाल ही में एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने संपत्ति कुर्क करने का आदेश भी दिया था। इसके बाद हाजिरी नहीं देने पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ।
गिरफ्तारी के दौरान हाई वोल्टेज ड्रामा
लोकसभा सत्र के बाद पप्पू यादव शुक्रवार रात करीब 11 बजे दिल्ली से पटना लौटे। इसी दौरान
- 5 थानों की पुलिस टीम
- सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी
इस दौरान समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, नारेबाजी हुई और कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण बन गई। पप्पू यादव ने गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
तबीयत बिगड़ी, अस्पताल ले जाया गया
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ गई।
- पहले उन्हें IGIMS ले जाया गया
- बेड नहीं मिलने पर PMCH शिफ्ट किया गया
उनके निजी सचिव ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि सांसद को पूरी रात स्ट्रेचर पर रखा गया, जो बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
NEET छात्रा मौत मामला: कहां से जुड़ते हैं तार?
पप्पू यादव ने हाल ही में NEET परीक्षा देने आई एक छात्रा की संदिग्ध मौत पर खुलकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने
- हॉस्टल प्रबंधन
- अस्पताल व्यवस्था
- पुलिस की भूमिका
पर गंभीर आरोप लगाए थे।
वे जहानाबाद जाकर पीड़ित परिवार से भी मिले थे और लगातार सोशल मीडिया पर न्याय की मांग कर रहे थे।
X (Twitter) पर क्या लिखा?
पप्पू यादव ने पोस्ट में लिखा—
“हमने NEET छात्र के लिए न्याय की लड़ाई लड़ी। इससे सत्ता और पुलिस को ठेस पहुंची। पप्पू यादव न झुकेगा, न रुकेगा।”
उनका दावा है कि गिरफ्तारी का समय जानबूझकर चुना गया, ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके।
पुलिस का क्या कहना है?
पटना पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि
- गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई
- NEET छात्रा मामले से इसका कोई सीधा संबंध नहीं
- अदालत के आदेश का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी थी
आगे क्या?
फिलहाल पप्पू यादव PMCH में भर्ती हैं और पुलिस हिरासत में हैं।
संभावना है कि उन्हें जल्द ही एमपी-एमएलए विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां
- जमानत
- आगे की कानूनी कार्रवाई
निष्कर्ष
- कानूनी रूप से गिरफ्तारी 31 साल पुराने केस में हुई
- राजनीतिक रूप से NEET छात्रा मामले और गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं
- असली सच अब अदालत के फैसले से ही सामने आएगा
बिहार की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
