बिहार के मुजफ्फरपुर में मुजफ्फरपुर प्रिंसिपल-टीचर शादी मामला चर्चा में है। क्या हुआ, कब हुआ, कहां हुआ, कौन शामिल है, क्यों विवाद बढ़ा और कैसे जांच चल रही है—इन सभी सवालों के जवाब सामने आ रहे हैं। 18 फरवरी को औराई थाना क्षेत्र के एक निजी स्कूल के 60 वर्षीय प्रिंसिपल ने 28 वर्षीय शिक्षिका से नेपाल में शादी की। अब मुजफ्फरपुर प्रिंसिपल-टीचर शादी मामला अपहरण के आरोप और पुलिस जांच तक पहुंच गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद यह मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है।
नेपाल के जनकपुर धाम में हुई शादी
जानकारी के अनुसार, निजी स्कूल संचालक सह प्रिंसिपल राकेश साह चार बच्चों के पिता बताए जाते हैं। उन्होंने अपने ही स्कूल में कार्यरत शिक्षिका शाइस्ता परवीन से विवाह किया।
दोनों 18 फरवरी को नेपाल के Janakpur धाम पहुंचे और वहीं शादी रचाई।
विवाह से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आया।
भाई ने लगाया अपहरण का आरोप
शाइस्ता परवीन के भाई ने औराई थाने में आवेदन देकर आरोप लगाया कि उनकी बहन को डरा-धमकाकर और बहला-फुसलाकर ले जाया गया।
शिकायत में राकेश साह, उनकी पत्नी और बेटी समेत सात लोगों को नामजद किया गया है।
परिवार ने अनहोनी की आशंका जताई है और सुरक्षा की मांग की है।
शिक्षिका का वीडियो बयान
शादी के बाद शाइस्ता परवीन का एक वीडियो सामने आया है।
वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से राकेश साह से विवाह किया है।
उन्होंने खुद को सुरक्षित बताया और अपहरण के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।
शिक्षिका ने यह भी दावा किया कि दोनों ने वर्ष 2025 में आपसी सहमति से विवाह कर लिया था।
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
मामले के प्रकाश में आने के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
दो समुदायों के बीच संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
औराई थाना प्रभारी ने बताया कि नामजद आरोपियों में से तीन लोगों के मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
कानूनी और सामाजिक पहलू
यदि दोनों वयस्क हैं और सहमति से विवाह हुआ है, तो कानून की नजर में विवाह वैध माना जा सकता है।
हालांकि, अपहरण का आरोप और पारिवारिक शिकायत पुलिस जांच का विषय है।
ऐसे मामलों में अदालत और जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेती हैं।
आम जनता पर क्या असर?
यह मामला सिर्फ एक निजी संबंध तक सीमित नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों से समाज में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस फैसले से लोगों को यह समझने का मौका मिला है कि वयस्कों के निजी फैसलों और पारिवारिक आपत्तियों के बीच संतुलन कैसे बनता है।
साथ ही, यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी आरोप की सत्यता जांच के बाद ही तय होती है।
आगे क्या?
पुलिस कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जरूरत पड़ने पर दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
स्थिति को संवेदनशील मानते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला सहमति का है या किसी प्रकार का दबाव शामिल था।
मुजफ्फरपुर का यह मामला व्यक्तिगत संबंध, सामाजिक सोच और कानूनी प्रक्रिया—तीनों पहलुओं को एक साथ सामने लाता है।
अब सबकी नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर है।
Source: स्थानीय पुलिस एवं प्रशासनिक जानकारी
