पटना नीट छात्रा मौत मामले में CBI जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। यह जांच कब और कहां तेज हुई, कौन अधिकारी इसे लीड कर रहे हैं, क्यों यह मामला संवेदनशील है और कैसे सबूत जुटाए जा रहे हैं—इन सभी सवालों का जवाब एक नाम से जुड़ता है: IPS राजीव रंजन। पटना और जहानाबाद में CBI जांच को गति देते हुए IPS राजीव रंजन खुद हर पहलू की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
सीबीआई ने हाल ही में जहानाबाद पहुंचकर मृत छात्रा के भाई का मोबाइल जब्त किया। टीम परिजनों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है।
इस हाई-प्रोफाइल केस की कमान ऐसे अधिकारी के हाथ में है, जिनकी पहचान सख्त और परिणाम देने वाली कार्यशैली से होती है।
कौन हैं IPS राजीव रंजन?
Rajeev Ranjan 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वे CBI में बिहार और झारखंड के ज्वाइंट डायरेक्टर (IG) के पद पर रांची मुख्यालय से सेवाएं दे रहे हैं।
वे मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के एमनडेरी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता स्वर्गीय मुरली प्रसाद शिक्षक थे।
प्रारंभिक शिक्षा नोखा के सर्वोदय स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने आरा और पटना में पढ़ाई की। पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक करने के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस पद हासिल किया।
बिहार की मिट्टी से निकले इस अधिकारी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
पटना नीट छात्रा मौत मामले में क्या कर रही है CBI?
CBI ने पटना और जहानाबाद में जांच का दायरा बढ़ाया है।
- डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं
- परिजनों से पूछताछ की जा रही है
- घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार की जा रही है
- कॉल डिटेल और मोबाइल डेटा का विश्लेषण हो रहा है
जांच टीम हर एंगल पर काम कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस मामले को लेकर राज्यभर में संवेदनशील माहौल है। छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच की प्रगति पर टिकी है।
सुरक्षा और एंटी-टेरर ऑपरेशन का अनुभव
CBI में आने से पहले राजीव रंजन ने CRPF में लंबे समय तक सेवाएं दीं।
उन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि की सुरक्षा से जुड़ी विशेष टीम का नेतृत्व किया।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। नगरोटा के हीरानगर रेंज में डीआईजी रहते हुए कई सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया।
साल 2025 में विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया।
उनका अनुभव बताता है कि वे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों को संभालने में दक्ष हैं।
चारा घोटाला और IRCTC केस में अहम भूमिका
राजीव रंजन का CBI में यह दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले वे 2011 से 2018 तक एजेंसी में रह चुके हैं।
1. चारा घोटाला
950 करोड़ रुपये के बहुचर्चित Fodder Scam की जांच में उनकी निर्णायक भूमिका रही। इस केस में राजद सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav को सजा हुई।
2. IRCTC होटल घोटाला
रेल मंत्री कार्यकाल से जुड़े IRCTC Hotel Scam की जांच भी उनकी निगरानी में हुई। इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव आरोपी हैं।
3. एंटी करप्शन एक्सपर्ट
वे कोलकाता और भुवनेश्वर में CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) के एसपी भी रह चुके हैं।
भ्रष्टाचार से जुड़े जटिल मामलों को सुलझाने का अनुभव उन्हें अलग पहचान देता है।
आम जनता के लिए क्यों अहम है यह जांच?
पटना नीट छात्रा मौत मामला केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल है।
इस फैसले से लोगों को निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है। छात्रों और अभिभावकों को भरोसा है कि सच्चाई सामने आएगी।
जब जांच की कमान अनुभवी अधिकारी के हाथ में होती है, तो पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद मजबूत होती है।
यही कारण है कि IPS राजीव रंजन की भूमिका इस केस में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या?
CBI आने वाले दिनों में और गवाहों से पूछताछ कर सकती है। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम तय होगा।
जांच की दिशा और निष्कर्ष पर पूरे राज्य की नजर है।
यह मामला केवल एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे की परीक्षा भी है।
Source: आधिकारिक एजेंसी जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स
