बिहार में सर्पदंश मुआवजा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। कब, कहां और किसने यह निर्णय लिया? बजट सत्र 2026 के दौरान पटना में विधानसभा समीक्षा बैठक के बाद यह घोषणा हुई। विधानसभा अध्यक्ष Prem Kumar ने निर्देश जारी कर दिया कि अब बिहार में सर्पदंश मुआवजा 4 लाख नहीं बल्कि 10 लाख रुपये मिलेगा। यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि सांप को वन्यजीव की श्रेणी में शामिल करने पर सहमति बनी। विभाग अब नई व्यवस्था लागू करेगा।
इस फैसले से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां हर साल सर्पदंश की घटनाएं सामने आती हैं।
क्या है पूरा मामला?
अब तक आपदा प्रबंधन विभाग सर्पदंश से मौत पर 4 लाख रुपये मुआवजा देता था।
लेकिन वन्यजीव के हमले से मौत होने पर 10 लाख रुपये का प्रावधान पहले से लागू है।
विधानसभा में सवाल उठा कि यदि सांप वन्यजीव है, तो सर्पदंश पर कम मुआवजा क्यों? इसी असमानता को दूर करने के लिए समीक्षा बैठक बुलाई गई।
समीक्षा के बाद निर्णय हुआ कि सर्पदंश को भी वन्यजीव हमले की श्रेणी में माना जाएगा।
किसने उठाया था मुद्दा?
दरभंगा के जाले से बीजेपी विधायक Jivesh Kumar Mishra ने बजट सत्र में यह सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा कि सरकार सांप को जंगली मानती है या पालतू? यदि वह वन्यजीव है तो मुआवजा अलग क्यों?
सदन में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना। मंत्री प्रमोद कुमार से भी जवाब मांगा गया।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय समीक्षा कराई।
10 लाख मुआवजा कैसे मिलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सर्पदंश से मौत पर मृतक के आश्रितों को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे।
संभावित प्रक्रिया इस प्रकार हो सकती है:
- सरकारी अस्पताल से जारी डेथ सर्टिफिकेट
- मृत्यु का स्पष्ट कारण “सांप का डसना” दर्ज होना
- स्थानीय प्रशासन को सूचना
- आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सत्यापन
जांच के बाद पात्रता तय होगी और मुआवजा जारी किया जाएगा।
सरकार ने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है।
पहले और अब में क्या अंतर?
| स्थिति | पहले | अब |
|---|---|---|
| सर्पदंश से मौत | 4 लाख | 10 लाख |
| वन्यजीव हमला | 10 लाख | 10 लाख |
अब दोनों श्रेणियों में समान राशि मिलेगी।
इस फैसले से मुआवजा प्रणाली में समानता आएगी और पीड़ित परिवारों को अधिक आर्थिक सहारा मिलेगा।
ग्रामीण इलाकों के लिए क्यों अहम है यह निर्णय?
बिहार के कई जिलों में बारिश और खेतों के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं।
ग्रामीण और गरीब परिवारों के लिए अचानक हुई मौत के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
इस फैसले से लोगों को त्वरित आर्थिक राहत मिल सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रशासनिक स्पष्टता भी बढ़ेगी और दावों में भ्रम कम होगा।
पहले क्या था आश्वासन?
पूर्व डिप्टी सीएम और दिवंगत बीजेपी नेता Sushil Kumar Modi ने अपने कार्यकाल में सांप को वन्यजीव घोषित करने का आश्वासन दिया था।
अब विधानसभा स्तर पर इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
हालांकि, आधिकारिक अधिसूचना और विस्तृत गाइडलाइन जारी होने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
यह निर्णय केवल राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं है।
इस फैसले से लोगों को भरोसा मिलेगा कि सरकार आपदा से जुड़े मामलों में समान और संवेदनशील दृष्टिकोण अपना रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है।
सर्पदंश जैसी अचानक घटना में 10 लाख रुपये का मुआवजा आर्थिक स्थिरता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आगे क्या?
अब निगाह इस बात पर है कि विभाग कब तक औपचारिक आदेश जारी करता है।
नई गाइडलाइन लागू होते ही जिला प्रशासन स्तर पर दावों की प्रक्रिया शुरू होगी।
राज्य में हर साल होने वाली सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए यह फैसला दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
Source: विधानसभा कार्यवाही और विभागीय जानकारी
