IPS Kamya Mishra: ‘वर्दी उतारी नहीं जाती, बस रूप बदलती है’ — इस्तीफे पर पहली बार बोलीं बिहार कैडर की चर्चित IPS

 


पटना: बिहार कैडर की चर्चित IPS अधिकारी काम्या मिश्रा ने अपने इस्तीफे को लेकर करीब 18 महीने बाद पहली बार खुलकर बात की है। एक टॉक शो में उन्होंने न केवल अपने फैसले की वजह बताई, बल्कि बतौर IPS बिहार में अपने अनुभव और भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

5 अगस्त 2024 को काम्या मिश्रा के इस्तीफे की खबर सामने आई थी। उस वक्त उन्होंने अपने रिजाइन लेटर में केवल “पारिवारिक और निजी कारण” लिखा था। इसके बाद न तो कोई बयान आया और न ही कोई सफाई। आखिरकार 27 मार्च 2025 को सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

‘वर्दी कभी उतरती नहीं, बस रूप बदलती है’

टॉक शो में काम्या मिश्रा ने कहा,

“वर्दी असल में कभी उतारी नहीं जाती, बस अपना रूप बदल लेती है।”

उन्होंने अपनी कहानी ओडिशा के रायरंगपुर से शुरू की। काम्या ने बताया कि यह छोटा सा इलाका, जिसने देश को राष्ट्रपति दिया, वहीं से उन्होंने बड़े सपने देखने की हिम्मत जुटाई।
2019 में पहले ही प्रयास में UPSC पास कर IPS बनीं, और 23 साल की उम्र में ASP बनने वाली देश की चुनिंदा महिला अधिकारियों में शामिल रहीं।

वैशाली से शुरू हुआ बिहार का सफर

काम्या मिश्रा ने बताया कि बिहार में उनका छह साल का कार्यकाल बेहद सीख देने वाला रहा।
उन्होंने वैशाली के लालगंज में SHO के रूप में करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे:

  • पटना में ASP सदर
  • सचिवालय SP
  • दरभंगा ग्रामीण SP

जैसे अहम पदों पर रहीं।

‘बिहार ने कभी महिला अधिकारी होने का एहसास नहीं कराया’

काम्या ने कहा कि बिहार में उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वे एक महिला अधिकारी हैं।

“मेरे सीनियर अधिकारियों ने हमेशा मुझे पुरुष सहकर्मियों के बराबर जिम्मेदारी दी। छापे हों, ऑपरेशन हों या फैसले — हर जगह समान व्यवहार मिला।”

पुलिस सेवा की कड़वी सच्चाई

पुलिस की नौकरी की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रोफेशन बाहर से जितना सख्त दिखता है, अंदर से उतना ही इमोशनली थका देने वाला होता है।

  • जब लोग होली-दिवाली परिवार के साथ मनाते हैं, पुलिस दंगों की आशंका से जूझती रहती है
  • सबसे कठिन पल तब होता है, जब साथी अधिकारी घायल या शहीद होते हैं
  • पुलिस अधिकारी को अक्सर सीनियर, परिवार और जनता — तीनों की नाराजगी झेलनी पड़ती है

उन्होंने कहा,

“हम हर दिन समाज के गंदे पानी को साफ करते हैं। यह गंदा पानी इंसानी दुख है, जो कभी खत्म नहीं होता।”

इस्तीफा नहीं, नई दिशा

काम्या मिश्रा ने साफ किया कि यह फैसला नौकरी छोड़ने का नहीं, बल्कि नई दिशा चुनने का था

“कुछ लोग सिस्टम के भीतर विकसित होते हैं, कुछ उसके परे। यह त्याग नहीं था, बल्कि कुछ नया बनाने के लिए जगह बनाना था।” 

अब आगे क्या करेंगी काम्या मिश्रा?

उन्होंने बताया कि अब वे शिक्षा के जरिए समाज की सेवा करना चाहती हैं।
उनका फोकस होगा:

  • लोगों को अवसर देना
  • युवाओं को आगे बढ़ने का मंच उपलब्ध कराना

बिहार को लेकर क्या बोलीं काम्या?

काम्या मिश्रा ने कहा,

“बिहार ने मुझे समाज को देखने का नया नजरिया दिया। यही वजह बनी कि मैंने अपने जीवन का सबसे बड़ा फैसला लिया। असली ताकत यह समझने में है कि कब छोड़ना है और आगे क्या बनाना है।”

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