बिहार बजट 2025-26 आज होगा पेश, साढ़े तीन लाख करोड़ से अधिक का अनुमान, रोजगार और विकास पर रहेगा फोकस

 बिहार बजट 2025-26 आज होगा पेश, साढ़े तीन लाख करोड़ से अधिक का अनुमान, रोजगार और विकास पर रहेगा फोकस


बिहार के आर्थिक भविष्य के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य सरकार आज विधानसभा में बिहार बजट 2025-26 पेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार की यह नई पारी का पहला पूर्ण बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सदन में प्रस्तुत करेंगे।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार बिहार का बजट 3.50 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट होगा।


20 साल में कई गुना बढ़ा बिहार का बजट आकार

पिछले दो दशकों में बिहार के बजट में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

  • वर्ष 2005-06 में बिहार का कुल बजट मात्र 26 हजार करोड़ रुपये था
  • वहीं 2025-26 तक यह बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार बजट में 10 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि संभव है, जो राज्य की आर्थिक योजनाओं को नई दिशा दे सकता है।


युवाओं के लिए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर बड़ा दांव

चुनाव के दौरान नीतीश सरकार ने “1 करोड़ नौकरी और रोजगार” का जो संकल्प लिया था, उसकी झलक इस बजट में दिखने की पूरी उम्मीद है।
सरकार युवाओं के लिए:

  • नए सरकारी पदों के सृजन
  • कौशल विकास योजनाओं
  • स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा

जैसे क्षेत्रों में विशेष बजटीय प्रावधान कर सकती है। यह बजट युवाओं की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।


सैलरी और पेंशन का बढ़ता बोझ बना बड़ी चुनौती

बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती वेतन और पेंशन खर्च को नियंत्रित करना है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • 2020-21 में सैलरी पर खर्च: 20,658.91 करोड़ रुपये
  • 2025-26 में अनुमानित सैलरी खर्च: 81,473.45 करोड़ रुपये

इसके अलावा पेंशन भुगतान और पुराने कर्ज के ब्याज पर भी हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इन अनिवार्य खर्चों के कारण विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाना सरकार के लिए एक कठिन संतुलन का काम बन गया है।


केंद्र पर निर्भरता कम करना बड़ी राजस्व चुनौती

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार अपनी कुल जरूरतों का केवल 27 प्रतिशत राजस्व ही खुद जुटा पाता है।
तुलना करें तो:

  • गुजरात: 76%
  • महाराष्ट्र: 70%

हालांकि राज्य की राजस्व वसूली में बीते वर्षों में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बिहार को केंद्रीय करों और अनुदानों पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ता है।


क्या बिहार बजट 2025-26 विकास की नई रफ्तार देगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट न केवल राज्य के विकास की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि सरकार रोजगार, पेंशन और प्रशासनिक खर्चों के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह बजट बिहार को आत्मनिर्भर राजस्व और तेज विकास की ओर ले जा पाएगा।

और नया पुराने
हमसे जुड़ें
1

बड़ी खबर सबसे पहले पाएं!

देश, बिहार और नौकरी से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।

👉 अभी WhatsApp चैनल जॉइन करें
होम क्विज वीडियो नोट्स NCERT