Income Tax Slab Budget 2026 Live: टैक्स को लेकर क्या-क्या हुए बड़े ऐलान? जानिए पूरी डिटेल
नई दिल्ली:
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026 पेश करते हुए इनकम टैक्स को लेकर स्थिति साफ कर दी है। बजट 2026 में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा करदाताओं को कोई नई राहत नहीं मिली है। सरकार ने नई टैक्स रिजीम को पहले की तरह ही बरकरार रखा है।
Income Tax Slab 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि नई टैक्स रिजीम के तहत इनकम टैक्स स्लैब पहले जैसे ही रहेंगे👇
नई टैक्स रिजीम – Income Tax Slab 2026
- ₹4 लाख तक की आय – कोई टैक्स नहीं
- ₹4 लाख से ₹8 लाख – 5% टैक्स
- ₹8 लाख से ₹12 लाख – 10% टैक्स
- ₹12 लाख से ₹16 लाख – 15% टैक्स
- ₹16 लाख से ₹20 लाख – 20% टैक्स
- ₹20 लाख से ₹24 लाख – 25% टैक्स
- ₹24 लाख से अधिक – 30% टैक्स
👉 हालांकि, धारा 87A के तहत मिलने वाली रिबेट के कारण
₹12 लाख तक की शुद्ध कर योग्य आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा।
यह व्यवस्था भी पिछले साल की तरह ही जारी रहेगी।
1 अप्रैल से लागू होगा आयकर अधिनियम 2025
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि:
- आयकर अधिनियम 2025 को
- यह कानून करीब 60 साल पुराने आयकर कानून की जगह लेगा
- नए कानून में Budget 2026-27 में किए गए सभी टैक्स बदलाव शामिल होंगे
- आयकर नियम (Rules) और ITR फॉर्म जल्द अधिसूचित किए जाएंगे
सीतारमण ने कहा,
“सरलीकृत आयकर नियम और फॉर्म इस तरह बनाए गए हैं कि सामान्य नागरिक बिना किसी परेशानी के टैक्स फाइल कर सकें।”
क्या बदला है और क्या नहीं?
✅ क्या बदला:
- आयकर कानून को सरल और स्पष्ट बनाया गया
- कानूनी अस्पष्टताएं दूर की गईं
- टैक्स से जुड़े मुकदमों की संभावना कम होगी
❌ क्या नहीं बदला:
- टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
- टैक्स दरें पहले जैसी ही
- कानून पूरी तरह Revenue Neutral है
आयकर कैसे तय होता है? जानिए टैक्स कैलकुलेशन का तरीका
इनकम टैक्स की गणना के लिए व्यक्ति की सभी स्रोतों से होने वाली आय जोड़ी जाती है, जैसे👇
- 💼 वेतन (Salary)
- 🏠 घर या प्रॉपर्टी से आय
- 🏘️ किराया
- 🏦 होम लोन के ब्याज से जुड़ी आय/छूट
- 📈 शेयर बाजार से कमाई
- 🏗️ अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री से मुनाफा
इन सभी स्रोतों से हुई कुल आय के आधार पर
👉 इनकम टैक्स देनदारी तय होती है।
Budget 2026 का टैक्स मैसेज साफ
- टैक्स सिस्टम को सरल बनाया गया है, लेकिन
- मध्यम वर्ग को नई टैक्स राहत नहीं
- फोकस Ease of Compliance और Litigation कम करने पर
