बिहार विधानसभा के बजट सत्र में EWS आयु सीमा छूट का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। पटना में प्रश्नकाल के दौरान जेडीयू विधायक देवेश कांत सिंह ने पूछा कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट दी जाएगी। EWS आयु सीमा छूट की मांग इसलिए उठी क्योंकि कई छात्र आर्थिक कारणों से समय पर तैयारी नहीं कर पाते। जवाब में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि मौजूदा केंद्रीय कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है और राज्य अपने स्तर पर संशोधन नहीं कर सकता।
इस चर्चा ने हजारों अभ्यर्थियों का ध्यान खींचा, जो आयु सीमा पार होने के कारण अवसर से वंचित हो रहे हैं।
विधायक ने क्यों उठाई आयु सीमा छूट की मांग?
देवेश कांत सिंह ने सदन में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई छात्र संसाधनों की कमी के कारण समय पर तैयारी नहीं कर पाते।
कोचिंग, किताबें और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
ऐसे में जब वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पूरी करते हैं, तब तक आयु सीमा पार हो जाती है।
उन्होंने गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या बिहार भी इस दिशा में पहल कर सकता है।
सरकार का जवाब: केंद्र के अधिनियम का हवाला
मंत्री विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि EWS से संबंधित मूल अधिनियम केंद्र सरकार ने बनाया है।
इस कानून में आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल केंद्र के अधिनियम के अनुरूप नियमावली लागू कर सकती है, उसमें बदलाव करने का अधिकार नहीं है।
हालांकि मंत्री ने यह भी जोड़ा कि सरकार इस विषय पर संभावनाओं का अध्ययन कर सकती है।
क्या अन्य राज्यों में मिल रही है छूट?
सदन में उठे सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि फिलहाल किसी अन्य राज्य द्वारा EWS वर्ग को आयु सीमा में छूट देने की आधिकारिक जानकारी सरकार के पास नहीं है।
यदि केंद्र सरकार भविष्य में कोई संशोधन या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो बिहार सरकार उस पर विचार करेगी।
यह बयान कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है, लेकिन युवाओं की उम्मीदें अभी भी बनी हुई हैं।
युवाओं के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा कई छात्रों के लिए निर्णायक होती है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र अक्सर पढ़ाई और रोजगार के बीच संतुलन बनाते हैं।
इस फैसले से लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में आने से उम्मीद जगी है कि भविष्य में समाधान तलाशा जा सकता है।
EWS आयु सीमा छूट का सवाल केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवसर की समानता से जुड़ा विषय है।
कानूनी और नीतिगत चुनौतियां
विशेषज्ञों के अनुसार, आयु सीमा में छूट देने के लिए अधिनियम में संशोधन जरूरी होगा।
राज्य सरकार सीधे बदलाव नहीं कर सकती, जब तक केंद्र स्तर पर नीति में संशोधन न हो।
इसलिए आगे की राह केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी।
फिर भी, राज्य स्तर पर अध्ययन और सिफारिशें भेजी जा सकती हैं।
क्या आगे बढ़ेगी बहस?
विधानसभा में हुई चर्चा से साफ है कि EWS वर्ग के युवाओं की समस्याएं अब राजनीतिक एजेंडा बन रही हैं।
विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।
आने वाले सत्रों में इस विषय पर और विस्तृत बहस संभव है।
यदि केंद्र सरकार भविष्य में नियमों में बदलाव करती है, तो लाखों अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
EWS आयु सीमा छूट पर बिहार सरकार ने फिलहाल कानूनी सीमाओं का हवाला देते हुए राहत से इंकार किया है।
हालांकि संभावनाओं के अध्ययन की बात कहकर भविष्य के लिए दरवाजा खुला रखा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह मुद्दा केंद्र स्तर तक पहुंचता है और क्या नीति में बदलाव होता है।
Source: बिहार विधानसभा बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान हुई चर्चा
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