प्रदेश में मंगलवार से Bihar Board 10th Exam शुरू हो गया। 1699 केंद्रों पर दो पालियों में परीक्षा आयोजित हो रही है। लेकिन पहले ही दिन Bihar Board 10th Exam में सख्त गाइडलाइन के कारण कई छात्र-छात्राओं को देर से पहुंचने पर प्रवेश नहीं मिला। पटना, बेतिया और सीतामढ़ी समेत कई जिलों में गेट समय पर बंद कर दिए गए। बोर्ड के निर्देश के मुताबिक निर्धारित समय के बाद किसी को एंट्री नहीं दी गई, चाहे देरी 2–3 मिनट की ही क्यों न हो।
पहले दिन का यह सख्त रुख कई परिवारों के लिए भावनात्मक झटका बन गया।
1699 केंद्रों पर परीक्षा, लेकिन सख्त नियम
बिहार बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि समय पर केंद्र पहुंचना अनिवार्य है।
राज्यभर में 1699 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
निर्देश था कि गेट तय समय पर बंद होगा और उसके बाद किसी को प्रवेश नहीं मिलेगा।
मंगलवार सुबह 9 बजे कई केंद्रों पर गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद जो छात्र पहुंचे, उन्हें बाहर ही रोक दिया गया।
पटना में क्या हुआ?
पटना के कमला नेहरू उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक छात्रा कुछ मिनट देरी से पहुंची।
उसे गेट पर रोक दिया गया। परिवार की विनती के बावजूद प्रवेश नहीं मिला।
बताया गया कि उसके पिता ने उसे गेट पार कराने की कोशिश भी की।
श्री दरोगा प्रसाद राय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चितकोहरा में निखिल नाम का छात्र भी 2 मिनट लेट पहुंचा।
उसने बताया कि मनेर से आने के दौरान 200 मीटर पहले जाम लगा था।
काफी अनुरोध के बाद भी उसे अंदर नहीं जाने दिया गया।
बेतिया और सीतामढ़ी में भी यही हाल
बेतिया के आमना उर्दू प्लस टू विद्यालय केंद्र पर कई छात्राएं ट्रैफिक जाम के कारण देर से पहुंचीं।
गेट बंद होने के बाद उन्हें प्रवेश नहीं मिला।
केंद्र के बाहर छात्राएं रोती नजर आईं।
सीतामढ़ी जिले के कई केंद्रों पर भी यही स्थिति रही।
डुमरा स्थित एमपी हाई स्कूल में कई छात्राएं एंट्री नहीं मिलने पर बेहोश हो गईं।
स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी।
क्यों नहीं मिली राहत?
बोर्ड ने पहले ही घोषणा की थी कि समय पर न पहुंचने वालों को प्रवेश नहीं मिलेगा।
अधिकारियों ने बोर्ड के सख्त निर्देशों का हवाला देते हुए किसी भी छात्र को छूट नहीं दी।
उनका कहना था कि नियम सभी के लिए समान हैं।
यही सख्ती कई छात्रों के लिए परीक्षा से वंचित होने का कारण बन गई।
छात्रों और अभिभावकों की पीड़ा
कई छात्र-छात्राएं गेट के बाहर रोते दिखे।
कुछ ने हाथ जोड़कर अधिकारियों से गुहार लगाई।
लेकिन नियमों के कारण उन्हें राहत नहीं मिली।
इस फैसले से लोगों को यह महसूस हुआ कि छोटी सी चूक पूरे साल की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
अब जिन छात्रों को प्रवेश नहीं मिला, उन्हें अगले वर्ष परीक्षा का इंतजार करना होगा।
क्या कहता है बोर्ड का नियम?
बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार:
- निर्धारित समय के बाद एंट्री नहीं
- दो पालियों में परीक्षा
- केंद्र पर समय से 30 मिनट पहले पहुंचने की सलाह
- कड़ी निगरानी और सख्त अनुशासन
बोर्ड का तर्क है कि धांधली रोकने और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है।
क्या सख्ती और संवेदनशीलता में संतुलन जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की पारदर्शिता के लिए समय सीमा जरूरी है।
लेकिन कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि 2–3 मिनट की देरी पर क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो सकती थी?
यह बहस अब सोशल मीडिया पर भी शुरू हो चुकी है।
इस फैसले से लोगों को संदेश मिला है कि समय पालन बेहद जरूरी है, लेकिन साथ ही संवेदनशीलता पर भी चर्चा हो रही है।
आगे क्या?
परीक्षा अगले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी।
बोर्ड ने छात्रों से अपील की है कि वे समय से पहले केंद्र पर पहुंचें।
प्रशासन ट्रैफिक प्रबंधन पर भी ध्यान देने की बात कर रहा है।
पहले दिन की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी की कोई गुंजाइश नहीं है।
क्यों अहम है यह मुद्दा?
- लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा है
- परीक्षा की निष्पक्षता बनाम मानवीय दृष्टिकोण
- ट्रैफिक और समय प्रबंधन की चुनौती
- सख्त गाइडलाइन का प्रभाव
Bihar Board 10th Exam का पहला दिन जहां अनुशासन का उदाहरण बना, वहीं कई परिवारों के लिए भावनात्मक परीक्षा भी साबित हुआ।
Source: स्थानीय प्रशासन और परीक्षा केंद्रों की जानकारी
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