UGC New Regulations: यूजीसी के नए नियमों की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट, फिलहाल 2012 के नियम रहेंगे लागू

 


नई दिल्ली: यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक यूजीसी रेगुलेशन 2012 ही प्रभावी रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि नए नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं, जिनका दुरुपयोग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई की तारीख 19 मार्च तय की है।

🔍 यूजीसी के नए नियमों पर क्या थी आपत्ति?

यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करना बताया गया था। यह नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी की आत्महत्या के बाद लाए गए थे।

नए नियमों में

  • SC, ST, OBC,
  • दिव्यांग,
  • और महिलाओं

को संरक्षण देने की बात कही गई थी।

हालांकि, जेनरल कैटेगरी के लोगों ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध किया। उनका कहना है कि:

  • नियमों में झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के लिए कोई दंड का प्रावधान नहीं है
  • इससे सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को निशाना बनाया जा सकता है

इसी कारण देशभर में इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए।

📜 UGC Regulation 2012 में क्या है?

यूजीसी ने वर्ष 2012 में भी जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नियम बनाए थे।
इन नियमों की खास बातें:

  • SC/ST वर्ग के लिए सुरक्षा प्रावधान
  • अनुशासन बनाए रखने पर जोर
  • गलत या झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और दंड का प्रावधान

इसी वजह से कोर्ट ने फिलहाल 2012 के नियमों को ही लागू रखने का फैसला लिया है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट में कौन कर रहा है सुनवाई?

यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं।
इस मामले की सुनवाई कर रही है:

  • जस्टिस सूर्यकांत
  • जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच

याचिकाकर्ताओं में:

  • मृत्युंजय तिवारी
  • एडवोकेट विनीत जिंदल
  • राहुल दीवान

शामिल हैं, जिन्होंने नियमों को जेनरल कैटेगरी के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया है।

🔎 सुप्रीम कोर्ट किन बिंदुओं की जांच करेगा?

सुप्रीम कोर्ट यह परखेगा कि:

  • क्या नए नियम जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव करते हैं?
  • क्या ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करते हैं?
  • क्या नियम किसी विशेष वर्ग के खिलाफ अनुचित रूप से कठोर हैं?

हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि अनुच्छेद 15(4) और 15(5) के तहत राज्य को SC/ST/OBC के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार है।
अंतिम फैसला संविधानिक जांच के बाद ही लिया जाएगा।

📌 आगे क्या?

  • 19 मार्च को अगली सुनवाई
  • नियमों में संशोधन की संभावना
  • या नए नियमों को पूरी तरह रद्द/लागू करने पर फैसला

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