Congress Politics: राहुल गांधी पर शकील अहमद का तीखा हमला, खरगे को बताया नाममात्र अध्यक्ष

 


भूमिका

कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बन गई है। पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर अब तक का सबसे तीखा बयान दिया है। उनके इन बयानों से न सिर्फ कांग्रेस में हड़कंप मचा है, बल्कि संगठनात्मक ढांचे और आंतरिक लोकतंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

“राहुल गांधी डरपोक और असुरक्षित नेता” – शकील अहमद

एक निजी टीवी चैनल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान शकील अहमद ने राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का “सबसे डरपोक और असुरक्षित नेता” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पार्टी के भीतर मजबूत और अनुभवी नेताओं से असहज महसूस करते हैं।

शकील अहमद के अनुसार, राहुल गांधी ऐसे लोगों से घिरे रहना पसंद करते हैं, जो उन्हें हर समय 'बॉस' जैसा महसूस कराएं। उनका कहना था कि कद्दावर नेताओं की मौजूदगी राहुल गांधी को असुरक्षित बना देती है, इसी कारण पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर डाल दिया गया है।

मल्लिकार्जुन खरगे केवल नाम के अध्यक्ष?

कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर हमला बोलते हुए शकील अहमद ने कहा कि मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केवल नाममात्र के अध्यक्ष हैं। उनके मुताबिक, पार्टी की असली कमान और निर्णय लेने की शक्ति आज भी राहुल गांधी के हाथों में ही केंद्रित है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो चुकी है और शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

‘संविधान बचाओ’ आंदोलन पर भी सवाल

शकील अहमद ने राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए गए ‘संविधान बचाओ’ अभियान को भी विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ने में नाकाम रहा और इसका कोई ठोस राजनीतिक लाभ कांग्रेस को नहीं मिला।

उनके अनुसार, सिर्फ नारों और अभियानों से पार्टी को मजबूत नहीं किया जा सकता, इसके लिए ठोस नेतृत्व और स्पष्ट रणनीति की जरूरत होती है।

मुस्लिम नेतृत्व की अनदेखी का आरोप

शकील अहमद ने कांग्रेस नेतृत्व पर मुस्लिम नेताओं की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कई बड़े नेता अब मुस्लिम नेताओं के साथ सार्वजनिक मंच पर दिखने या फोटो खिंचवाने से भी बचते हैं।

उनका दावा है कि नेतृत्व को डर रहता है कि मुस्लिम नेताओं के साथ दिखने से कहीं उनका हिंदू वोट बैंक प्रभावित न हो जाए। शकील अहमद ने कांग्रेस की मुस्लिम आउटरीच रणनीति को केवल दिखावा बताया और कहा कि जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिखता।

कांग्रेस के भीतर छिड़ी नई बहस

राहुल गांधी के कभी करीबी माने जाने वाले शकील अहमद के इस बयान ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को खुलकर सामने ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी के नेतृत्व संकट और संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करता है।

साथ ही, यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या कांग्रेस में अलग-अलग विचारों और समुदायों के नेताओं को समान महत्व मिल पा रहा है या नहीं।

आगे क्या?

शकील अहमद के इन आरोपों के बाद कांग्रेस नेतृत्व की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल इतना तय है कि यह बयान पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है और आने वाले समय में कांग्रेस की राजनीति को और गरमा सकता है।

और नया पुराने
हमसे जुड़ें
1

बड़ी खबर सबसे पहले पाएं!

देश, बिहार और नौकरी से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।

👉 अभी WhatsApp चैनल जॉइन करें
होम क्विज वीडियो नोट्स NCERT