भूमिका
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच संभावित दूरी की चर्चाओं के बीच एनडीए के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कांग्रेस पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कांग्रेस के फैसलों और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सोच बहुत पहले आ जानी चाहिए थी।
“बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते” – मांझी का तंज
जीतन राम मांझी ने कांग्रेस और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को अब यह समझ में आ रहा है कि उसने किस तरह का गठबंधन किया था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अब अलग-अलग लोगों से राय ले रहे हैं और संगठन को लेकर सक्रिय दिख रहे हैं, लेकिन यह सब काफी देर से हो रहा है।
मांझी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते”, यह काम पहले होना चाहिए था। उनका कहना था कि कांग्रेस की कभी जनता के बीच एक अलग पहचान और गरिमा थी, लेकिन जिस पार्टी से उसने गठबंधन किया, उससे समाज के कुछ वर्गों को छोड़कर अधिकांश लोग नफरत करते हैं। इसी वजह से कांग्रेस भी धीरे-धीरे उसी छवि का शिकार बन गई।
गठबंधन तोड़ना सही फैसला?
जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर कांग्रेस अब आरजेडी से अलग होने का फैसला कर रही है, तो यह उसके लिए सही कदम हो सकता है। उनके अनुसार, गठबंधन के कारण कांग्रेस को बिहार में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने में असफल रही और उसे गठबंधन सहयोगी की छवि में देखा जाने लगा।
2025 विधानसभा चुनाव की हार की पृष्ठभूमि
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा कमजोर नजर आई और पार्टी महज 6 सीटों पर सिमट कर रह गई। इसी चुनावी नतीजे के बाद से कांग्रेस के भीतर आरजेडी के साथ गठबंधन को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा।
कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि चुनाव प्रचार के दौरान आरजेडी की पुरानी “जंगलराज” वाली छवि और विवादित बयानों व गानों का नकारात्मक असर पड़ा, जिसका खामियाजा कांग्रेस को भी उठाना पड़ा।
दिल्ली बैठक में भी उठे गठबंधन पर सवाल
हाल ही में दिल्ली में हुई कांग्रेस की अहम बैठक में भी इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों ने आरजेडी के साथ गठबंधन को असहज और नुकसानदेह बताया। सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश विधायक गठबंधन से दूरी बनाने के पक्ष में नजर आए।
हालांकि, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अभी भी गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर बताए जा रहे हैं। पूर्व विधायक दल नेता शकील अहमद पहले से ही आरजेडी से दूरी बनाने की वकालत करते रहे हैं और उनका मानना है कि कांग्रेस को बिहार में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन मजबूत करनी चाहिए।
बिहार की राजनीति में आगे क्या?
RJD और कांग्रेस के रिश्तों में बढ़ती खटास के बीच जीतन राम मांझी का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला लेती है या नहीं।
फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं और आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासत पर साफ नजर आ सकता है।
