Bihar Bhumi News: बिहार सरकार ने नगर निकायों के परिसीमन और भू-लगान व्यवस्था को लेकर दो अहम फैसलों का ऐलान किया है। एक ओर जहां परिसीमन के बाद भी निर्वाचित नगर समितियों को भंग नहीं करने का भरोसा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर फर्जी और ऑफलाइन भू-लगान रसीद जारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई का संकेत दिया गया है। सरकार का कहना है कि ये फैसले लोकतंत्र की मजबूती और प्रशासनिक पारदर्शिता को और मजबूत करेंगे।
परिसीमन के बाद भी नहीं टूटेंगी नगर समितियां
उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि जिन नगर निकायों का परिसीमन या क्षेत्र विस्तार हो चुका है, वहां भी नगर समितियां भंग नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि निर्वाचित पार्षदों का कार्यकाल पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और वे अपना शेष कार्यकाल पूरा करेंगे।
डिप्टी सीएम ने दो टूक कहा कि केवल परिसीमन या क्षेत्र विस्तार के नाम पर चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हटाना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप। सरकार किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद मिला आश्वासन
यह भरोसा उस समय दिया गया जब कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने दानापुर निजामत नगर परिषद के क्षेत्र विस्तार को लेकर अपनी चिंता जताई।
इस विस्तार में फरीदनपुर, मैनपुरा, जमसौत, ढिबरा, कोथवा, मुस्तफापुर, बबक्करपुर, आशोपुर और नसीरपुर जैसे गांवों को शामिल किया गया है। नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में नए सिरे से वार्ड परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होती है, जबकि यहां मौजूदा पार्षदों का करीब डेढ़ साल का कार्यकाल अभी शेष है।
इस पर डिप्टी सीएम ने साफ किया कि इस स्थिति में नए चुनाव नहीं कराए जाएंगे और वर्तमान नगर समिति पूर्ववत काम करती रहेगी।
8 नगर निकायों पर कार्रवाई, 29 पर फिलहाल रोक
बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के तहत राज्य के 8 नगर निकायों से जुड़े प्रस्ताव अधिसूचित कर निर्वाचन आयोग को भेजे जा चुके हैं। वहीं 29 नगर निकायों के मामलों में जनगणना आयोग के निर्देशों के कारण 31 मार्च 2027 तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक रहेगी।
इस फैसले से कई नगर क्षेत्रों में फिलहाल यथास्थिति बनी रहेगी और पार्षदों को कार्य करने का पूरा अवसर मिलेगा।
फर्जी भू-लगान रसीद पर सरकार का सख्त रुख
दूसरा बड़ा फैसला राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़ा है। उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अब ऑफलाइन भू-लगान रसीद जारी करना आपराधिक कृत्य माना जाएगा। सरकार ने इस पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है।
सीतामढ़ी, वैशाली, पूर्वी चंपारण, सहरसा और सुपौल जैसे जिलों से शिकायतें मिली हैं कि कुछ जगहों पर अब भी ऑफलाइन रसीद जारी की जा रही है, जबकि पूरी भू-लगान व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है।
दोषी अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
डिप्टी सीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने पर न केवल कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई होगी, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता, ईमानदारी और आम जनता के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
बिहार सरकार के ये फैसले नगर निकायों में लोकतांत्रिक स्थिरता बनाए रखने और भूमि राजस्व व्यवस्था को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। एक तरफ पार्षदों के अधिकार सुरक्षित किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर फर्जी भू-लगान जैसे मामलों पर सख्ती से निपटने का रोडमैप तैयार किया गया है।
