बिहार में बाढ़ से 10 हजार करोड़ का नुकसान, 15 अक्टूबर के बाद आएगी रिपोर्ट

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 बिहार बाढ़ से करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक आकलन सामने आया है। बिहार बाढ़ से नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं हुआ है, क्योंकि पानी उतरने के बाद फसल, सड़क, पुल और दूसरी संरचनाओं को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे होगा। राज्य सरकार 15 अक्टूबर के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की तैयारी में है। बुधवार को केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने बाढ़ से हुई क्षति की प्रारंभिक जानकारी प्रस्तुत की। विभागों ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए नुकसान का विवरण साझा किया।

10 हजार करोड़ के शुरुआती नुकसान का आकलन

राज्य सरकार के अनुसार अभी करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान है। हालांकि, यह आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा रहा है। पानी पूरी तरह उतरने के बाद अलग-अलग विभाग जमीन पर जाकर नुकसान का आकलन करेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग की विस्तृत रिपोर्ट इसके बाद तैयार होगी। अधिकारियों के मुताबिक अंतिम आंकड़ा शुरुआती अनुमान से अधिक हो सकता है। सभी जिलों में टीमें भेजकर स्थानीय स्तर पर नुकसान की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद बिहार सरकार केंद्र सरकार को विस्तृत ज्ञापन सौंपेगी। इसमें फसल से लेकर सड़क, बांध और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का ब्योरा शामिल होगा।

15 अक्टूबर के बाद तैयार होगी अंतिम रिपोर्ट

राज्य सरकार ने नुकसान के सटीक आकलन के लिए पानी उतरने का इंतजार करने का फैसला किया है। अधिकारियों के मुताबिक 15 अक्टूबर के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में कृषि, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग सहित कई विभाग शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बताया गया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में वास्तविक नुकसान का आकलन पानी कम होने के बाद ही बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। उन्होंने पानी कम होने के बाद अंतर-मंत्रालयी टीम बिहार भेजने की बात कही। यह टीम राज्य की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर नुकसान की समीक्षा कर सकती है।

डेढ़ लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित

कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा है। धान और मक्का की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित बताई गई है। इसके अलावा सब्जी और केले की खेती को भी बाढ़ से नुकसान हुआ है। पानी उतरने के बाद कृषि विभाग प्रभावित किसानों से इनपुट अनुदान के लिए आवेदन मांग सकता है। सहायता का निर्धारण फसल और क्षेत्र की स्थिति के अनुसार नियमों के तहत किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार असिंचित क्षेत्र में फसल क्षति पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित क्षेत्र में 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर इनपुट अनुदान का प्रावधान है। बहुवर्षीय फसल गन्ने के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान बताया गया है। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए सहायता मिलने की व्यवस्था है। सरकार प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक खेती के लिए मटर, सरसों और दूसरी फसलों के बीज उपलब्ध कराने की भी तैयारी कर रही है।

बांधों की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी

जल संसाधन विभाग ने बाढ़ से प्रभावित कई बांधों को लेकर भी जानकारी दी। भागलपुर के राघोपुर में मार्जिनल बांध का नए सिरे से निर्माण करने की योजना बताई गई है। वहीं, वाल्मीकिनगर बराज के पास बिहार क्षेत्र में कुछ जगहों पर बांध कमजोर बताए गए हैं। विभाग के अनुसार इन स्थानों पर मरम्मत की जरूरत है। पुनपुन नदी में इस बार अधिक पानी आने से कई जगह छोटे बांध टूटे और कुछ स्थानों पर बांध के ऊपर से पानी बहा। इसे देखते हुए अगले मानसून से पहले ऐसे संवेदनशील स्थानों पर बांध की ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी है। आबादी के नजदीक से गुजरने वाले दूसरे बांधों की भी विशेष मरम्मत की जाएगी। सरकार का उद्देश्य अगले मानसून से पहले बाढ़ के जोखिम वाले ढांचों को मजबूत करना है।

शिवराज बोले- प्रधानमंत्री के निर्देश पर आया हूं

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार को बाढ़ के संकट से निकालने में केंद्र सरकार राज्य के साथ खड़ी है। वैशाली के राघोपुर के समीप पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री के निर्देश पर वह बिहार आए हैं। उन्होंने बिहार में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए केंद्र की ओर से सहयोग का भरोसा भी जताया। शिवराज सिंह चौहान ने मुंगेर और भागलपुर में संचालित राहत शिविरों का दौरा किया तथा वहां रह रहे लोगों और बच्चों से बातचीत की।

दुर्गापूजा से पहले केंद्र को भेजी जाएगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा करके केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा से पहले नुकसान का पूरा आकलन केंद्र के सामने रखने की तैयारी है। इसके बाद किसानों और अन्य प्रभावित लोगों को नियमों के अनुसार सहायता और मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए भी काम करना जरूरी है। आने वाले दिनों में केंद्र की अन्य टीमें बिहार पहुंचकर स्थिति की समीक्षा कर सकती हैं। फिलहाल 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान प्रारंभिक अनुमान है। पानी उतरने और जिलास्तरीय सर्वे पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार में बाढ़ से कुल नुकसान कितना हुआ।

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