समस्तीपुर के मुखिया पर बड़ी कार्रवाई, 11 लाख गबन मामले में पद गया, 5 साल का चुनाव बैन
समस्तीपुर मुखिया कार्रवाई से जुड़ा बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। समस्तीपुर मुखिया कार्रवाई के तहत खानपुर प्रखंड की श्रीपुर गाहर पश्चिमी पंचायत के मुखिया रमेश मांझी को कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप में पद से हटा दिया गया है। बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत जारी आदेश में उन्हें अगले पांच वर्षों तक किसी भी पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए भी अयोग्य घोषित किया गया है। यह कार्रवाई वर्ष 2023 में ठेला-रिक्शा एवं डिब्बा खरीद योजना में लगभग 11 लाख रुपये की कथित अनियमित निकासी से जुड़े मामले में प्रशासनिक जांच के बाद की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2023 में संचालित ठेला-रिक्शा एवं डिब्बा खरीद योजना से जुड़ा है। आरोप है कि योजना के तहत लगभग 11 लाख रुपये की राशि मुखिया के बैंक खाते के माध्यम से निकाली गई।
जांच में यह सवाल उठा कि भुगतान संबंधित एजेंसी या वेंडर के नाम होने के बजाय व्यक्तिगत बैंक खाते के जरिए क्यों किया गया। इसी आधार पर मामले की जांच शुरू हुई।
प्रशासन के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट में वित्तीय प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले।
किस आधार पर हटाया गया मुखिया?
आदेश के अनुसार, उपलब्ध अभिलेखों, जांच प्रतिवेदन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह माना गया कि पद से जुड़े अधिकारों के उपयोग में गंभीर अनियमितता और कर्तव्यों के निर्वहन में दुराचार के आरोप प्रथम दृष्टया सामने आए।
इसी आधार पर बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत रमेश मांझी को मुखिया पद से हटाने का आदेश जारी किया गया।
इसके साथ ही उन्हें अगले पांच वर्षों तक पंचायत निकाय के किसी भी चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
जिला पंचायती राज पदाधिकारी, समस्तीपुर की स्थलीय जांच में पंचायत के विभिन्न वार्डों में ठेला-रिक्शा और डिब्बे उपलब्ध पाए गए।
हालांकि जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इन सामग्रियों की खरीद भुगतान होने के लगभग दो महीने बाद की गई थी, जबकि योजना की राशि वर्ष 2023 में ही जारी और निकाली जा चुकी थी।
यही तथ्य जांच का महत्वपूर्ण आधार बना।
11 लाख रुपये की निकासी कब हुई?
जांच रिपोर्ट के अनुसार योजना की राशि अलग-अलग तिथियों में निकाली गई थी।
- 5 जुलाई 2023: 5 लाख रुपये
- 13 जुलाई 2023: दो किस्तों में कुल 5 लाख रुपये (प्रत्येक 2.50 लाख रुपये)
- 16 नवंबर 2023: 1 लाख रुपये
इस प्रकार कुल 11 लाख रुपये चेक के माध्यम से निकाले गए।
जांच में यह भी सामने आया कि राशि मुखिया के बैंक खाते से निकाली गई, जबकि नियमानुसार भुगतान सीधे संबंधित एजेंसी या अधिकृत वेंडर के नाम किया जाना चाहिए था।
FIR भी दर्ज हुई थी
इस मामले में पहले ही खानपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी थी।
मुखिया रमेश मांझी के विरुद्ध तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 419 (प्रतिरूपण) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
प्रशासनिक कार्रवाई इन आरोपों से संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
पंचायत पर क्या होगा असर?
मुखिया पद खाली होने के बाद पंचायत के प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए आगे की प्रक्रिया संबंधित विभाग द्वारा तय की जाएगी।
चुनाव संबंधी या प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग आवश्यक निर्णय लेंगे।
यह कार्रवाई पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन की सख्ती का संकेत भी मानी जा रही है।
एक नजर में पूरा मामला
- समस्तीपुर के खानपुर प्रखंड की श्रीपुर गाहर पश्चिमी पंचायत के मुखिया पद से रमेश मांझी हटाए गए।
- मामला ठेला-रिक्शा एवं डिब्बा खरीद योजना में लगभग 11 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है।
- प्रशासनिक जांच के बाद बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत कार्रवाई हुई।
- पांच वर्षों तक पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई।
- मामले में पहले से खानपुर थाना में FIR दर्ज है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
फिलहाल यह कार्रवाई प्रशासनिक जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की गई है। यदि मामले में आगे कोई न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय आता है, तो उसके अनुसार स्थिति में बदलाव संभव है।
