पटना में 14.67 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, चीन कनेक्शन से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़
पटना साइबर ठगी मामले में साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पटना साइबर ठगी से जुड़े इस नेटवर्क पर आरोप है कि देशभर में साइबर अपराध से जुटाई गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जाता था। जांच के दौरान इस गिरोह के तार चीन से जुड़े अपराधियों तक पहुंचने के संकेत मिले हैं। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
14.67 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े चार आरोपी गिरफ्तार
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने पटना साइबर थाना के सहयोग से कंकड़बाग और नालंदा के हिलसा क्षेत्र में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कंकड़बाग के रामलखन पथ निवासी गौतम गंभीर और विवान सिंह, रामकृष्णा नगर निवासी तनय सिंह तथा हिलसा के बिहारी रोड निवासी सुमित राज को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिसके आधार पर पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ा रही है।
आरोपियों के पास से बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और मोबाइल बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई अहम सामान जब्त किए। इनमें शामिल हैं—
- 6 बैंक पासबुक
- 13 एटीएम कार्ड
- 10 चेकबुक
- 4 मोबाइल फोन
- 8 सिम कार्ड
- बैंक संबंधी मुहर
- क्यूआर पेमेंट कोड और अन्य दस्तावेज
पुलिस का मानना है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम के लेन-देन और मनी ट्रांसफर के लिए किया जाता था।
म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी की रकम विदेश भेजी जाती थी
जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न बैंकों में म्यूल अकाउंट खुलवाते थे। साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद उसे अलग-अलग माध्यमों से निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया जाता था।
प्राथमिक जांच में जिन बैंक खातों की जानकारी मिली है, उनसे जुड़े मामलों में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 14 करोड़ 67 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चीन से जुड़े अपराधियों तक पहुंचती थी रकम
पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि ठगी की रकम क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल करेंसी में बदली जाती थी। इसके बाद यह राशि विदेशी संचालकों तक पहुंचाई जाती थी।
जांच एजेंसियां विशेष रूप से चीन से जुड़े संदिग्ध साइबर अपराधियों और इस नेटवर्क के बीच संभावित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच जारी है।
कॉरपोरेट बैंक खाते खुलवाने में मिलीभगत की आशंका
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य विभिन्न बैंकों में कॉरपोरेट खाते खुलवाने में सक्रिय थे। इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था।
अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस प्रक्रिया में बैंक अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों की भूमिका तो संदिग्ध नहीं रही। यदि किसी स्तर पर मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरे नेटवर्क की तलाश में लगातार छापेमारी
सीसीएसयू के अनुसार गिरफ्तार चार आरोपी इस नेटवर्क का केवल एक हिस्सा हैं। गिरोह से जुड़े अन्य सहयोगियों और विदेशी संपर्कों की पहचान की जा रही है।
पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और डिजिटल ट्रांजैक्शन, बैंक खातों तथा मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
साइबर अपराध से बचने के लिए रखें ये सावधानियां
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए—
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता उपयोग न करने दें।
- अपना एटीएम कार्ड, ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- संदिग्ध निवेश या कमाई वाले ऑनलाइन ऑफर से बचें।
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय साइबर थाना से संपर्क करें।
