संसद में अलग अंदाज में पहुंचे पप्पू यादव, ओवरकोट पर लिखे सियासी संदेश बने चर्चा का विषय

पप्पू यादव एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। सोमवार को पप्पू यादव संसद परिसर में ऐसे ओवरकोट पहनकर पहुंचे, जिसने मीडिया और राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनके इस विशेष परिधान पर सरकार, भ्रष्टाचार, NEET पेपर लीक और धार्मिक आस्था से जुड़े कई राजनीतिक संदेश लिखे गए थे। संसद पहुंचते ही कैमरे उनके आसपास जुट गए और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगीं। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद और कांग्रेस नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अक्सर अपने अलग अंदाज और बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने अपने पहनावे के जरिए विभिन्न मुद्दों पर अपनी राजनीतिक राय सार्वजनिक की।
पप्पू यादव के ओवरकोट ने क्यों खींचा सबका ध्यान?
पप्पू यादव का ओवरकोट आगे से सफेद और पीछे से केसरिया रंग का था। इस पर कई राजनीतिक और सामाजिक संदेश लिखे गए थे। संसद परिसर में प्रवेश करते ही मीडिया की नजर सबसे पहले उनके इसी परिधान पर गई। ओवरकोट के पीछे लिखे संदेशों में चंदा, धार्मिक आस्था और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल उठाए गए थे। वहीं आगे के हिस्से में NEET पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े संदेश लिखे गए थे। उनका यह अंदाज संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही चर्चा का विषय बन गया।
ओवरकोट पर लिखे गए कौन-कौन से संदेश?
पप्पू यादव के ओवरकोट के पीछे कई राजनीतिक नारे और सवाल लिखे थे। इनमें प्रमुख रूप से लिखा गया—
- "चंदा चोरी पर सरकार मौन क्यों?"
- "इस महाघोटाले का मास्टरमाइंड कौन?"
- "आस्था का सौदा मंजूर नहीं, दोषियों को जेल भेजो।"
- "भगवान के नाम पर व्यापार, शर्म करो सरकार।"
- "राम नाम की लूट मची है, अंधेर नगरी चौपट राजा।"
वहीं ओवरकोट के सामने NEET पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जुड़े संदेश लिखे गए थे। इनमें छात्रों के भविष्य की चिंता जताते हुए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग की गई।
प्रधानमंत्री पर भी साधा राजनीतिक निशाना
संसद पहुंचने के बाद पप्पू यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस विशेष ओवरकोट की तस्वीरें साझा कीं। फेसबुक पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री को अपनी निजी गरिमा का ध्यान न हो तो कम-से-कम पद की मर्यादा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा कि उनका इशारा प्रधानमंत्री की ओर है, न कि किसी "76 साल के बच्चे" की ओर, जिसे मर्यादा और गरिमा की समझ न हो। यह पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया।
NEET और भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी बनाया केंद्र
पप्पू यादव ने अपने ओवरकोट के जरिए NEET पेपर लीक मामले को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने संदेशों के माध्यम से कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दे लगातार राष्ट्रीय बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में संसद परिसर में इस मुद्दे को इस तरह उठाना भी राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया।
संसद में अलग अंदाज से संदेश देने की पुरानी शैली
भारतीय राजनीति में कई नेता समय-समय पर पोस्टर, तख्ती, काली पट्टी, विशेष पोशाक या अन्य प्रतीकों के जरिए अपनी बात रखते रहे हैं। पप्पू यादव भी पहले कई मौकों पर अलग अंदाज में विरोध दर्ज करा चुके हैं। इस बार उन्होंने अपने पहनावे को ही राजनीतिक संदेश का माध्यम बनाया। संसद परिसर में उनका यह रूप मीडिया और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का केंद्र बना रहा। हालांकि, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। संसद में इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के रूप में भी देखा जाता है, जबकि राजनीतिक विरोधी इसे अलग नजरिए से देखते हैं।