भरत तिवारी एनकाउंटर: 5 जुलाई की बहुजन महापंचायत में नहीं जाएंगे मांझी, कही बड़ी बात


 Jitan Ram Manjhi ने भोजपुर के जगदीशपुर में 5 जुलाई को प्रस्तावित बहुजन महापंचायत में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है। Jitan Ram Manjhi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए आयोजकों से कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित करने की अपील की है। इससे पहले उन्होंने स्वयं इस महापंचायत में शामिल होने की घोषणा की थी, लेकिन अब बदलते हालात का हवाला देते हुए संयम बरतने की जरूरत बताई है। उनके इस फैसले के बाद कार्यक्रम और उससे जुड़े राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

Jitan Ram Manjhi ने एक्स पर क्या लिखा?

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्यहित और सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों में बहुजन महापंचायत को फिलहाल स्थगित कर देना चाहिए। उन्होंने लिखा कि मौजूदा हालात में सभी को संयम से काम लेना होगा। उनके अनुसार कुछ लोग ऐसे अवसर की तलाश में हैं, जहां किसी भी अप्रिय घटना का आरोप दूसरे पक्ष पर लगाया जा सके। इसलिए यह समय धैर्य और समझदारी से निर्णय लेने का है। मांझी के इस संदेश से साफ हो गया कि वह अब 5 जुलाई को आयोजित होने वाली बहुजन महापंचायत में शामिल नहीं होंगे।

पहले खुद किया था शामिल होने का ऐलान

दिलचस्प बात यह है कि 27 जून 2026 को जीतन राम मांझी ने एक्स पर पोस्ट कर 5 जुलाई के कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा की थी। उन्होंने उस समय लिखा था कि "देश की जनता करें पुकार, बहुजन एकता अबकी बार" के नारों के बीच वह आरा पहुंचेंगे और जगदीशपुर में आयोजित बहुजन महासभा में भाग लेंगे। हालांकि अब उन्होंने अपने पहले के रुख से अलग फैसला लेते हुए कार्यक्रम से दूरी बना ली है। साथ ही आयोजकों से भी महापंचायत स्थगित करने का अनुरोध किया है।

बहुजन महापंचायत क्यों हो रही है?

जानकारी के अनुसार 17 जून को भरत तिवारी का पुलिस एनकाउंटर हुआ था। भरत तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी। इसी मुद्दे को लेकर 24 जून को एक महापंचायत आयोजित की गई थी। उस बैठक में सरकार से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग उठाई गई थी। अब उसी घटनाक्रम के बाद जगदीशपुर में 5 जुलाई को बहुजन महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई। आयोजकों का उद्देश्य दलित और पिछड़े समाज को एक मंच पर लाना बताया गया है।

बदलते घटनाक्रम के बीच बढ़ी राजनीतिक चर्चा

जीतन राम मांझी के कार्यक्रम से हटने के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी राजनीतिक कारण का उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने केवल वर्तमान परिस्थितियों और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहिए जिससे तनाव बढ़ने की आशंका हो। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजक उनकी अपील को स्वीकार करते हैं या तय कार्यक्रम के अनुसार बहुजन महापंचायत का आयोजन करते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल आयोजकों की ओर से कार्यक्रम स्थगित करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। यदि आयोजन निर्धारित तिथि पर होता है तो स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी अहम मानी जाएगी। वहीं, जीतन राम मांझी के इस फैसले ने यह संकेत दिया है कि संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर राजनीतिक दल और नेता अपने कदम परिस्थितियों के अनुसार तय कर रहे हैं। 5 जुलाई को होने वाली प्रस्तावित बहुजन महापंचायत पर अब सभी की नजर रहेगी। आयोजकों के अगले निर्णय और प्रशासन की तैयारियां इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती हैं।

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