बिहार विधानसभा मानसून सत्र की शुरुआत हंगामे से, NEET-NTA मुद्दे पर विपक्ष का प्रदर्शन, सरकार ने गिनाईं 100 दिन की उपलब्धियां

बिहार विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राजनीतिक गतिविधियां पूरे दिन चर्चा में रहीं। बिहार विधानसभा मानसून सत्र की शुरुआत सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के साथ हुई। एक ओर सरकार अनुपूरक बजट, महत्वपूर्ण विधेयकों और अपने 100 दिनों के कामकाज को सदन में रखने की तैयारी के साथ पहुंची, वहीं विपक्ष ने NEET परीक्षा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दिनभर के घटनाक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
विपक्ष ने NEET और NTA को लेकर खोला मोर्चा
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक और विधान पार्षद विधानसभा परिसर के बाहर तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। प्रदर्शन का केंद्र NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए विवाद रहे। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हितों से जुड़े कई नारे लगाए गए और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की गई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
राजद नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने NTA को भंग कर अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई। विपक्ष का कहना था कि वर्षों की मेहनत करने वाले छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा नहीं मिल रही है। इससे युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ रहा है और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। विपक्ष ने संकेत दिए कि इन मुद्दों को मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
सरकार ने 100 दिनों की उपलब्धियां रखीं
दूसरी ओर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत सरकार के सभी प्रमुख मंत्री और सत्तापक्ष के विधायक समय पर विधानसभा पहुंचे। सरकार ने अपने 100 दिन पूरे होने के अवसर पर विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण से जुड़े फैसलों का उल्लेख करते हुए अपनी उपलब्धियां सदन के पटल पर रखीं। सरकार का दावा है कि इस अवधि में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों पर तेजी से काम किया गया है। आगामी दिनों में अनुपूरक बजट और विभिन्न विधेयकों पर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है।
नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति के बावजूद सक्रिय रहा विपक्ष
मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद राजद और वाम दलों के विधायक पूरी तैयारी के साथ सदन पहुंचे और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। विपक्ष का फोकस विशेष रूप से शिक्षा, युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और केंद्र सरकार से जुड़े विषयों पर रहा। वहीं सत्ता पक्ष विकास कार्यों और अपनी उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत करता दिखाई दिया।
विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मानसून सत्र को देखते हुए विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया था। सभी प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तथा सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रही। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती ताकि सत्र के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। आने वाले दिनों में भी महत्वपूर्ण विधेयकों और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था इसी तरह जारी रहने की संभावना है।
आगे क्या रहेगा सत्र का फोकस?
पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान सरकार अनुपूरक बजट और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है। वहीं विपक्ष शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, युवाओं के मुद्दे और अन्य जनहित के विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप तेज रहने की संभावना है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का प्रयास करेगा, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति अपनाएगा।