नेता प्रतिपक्ष के बिना शुरू होगा बिहार विधानसभा मॉनसून सत्र, 13 अहम विधेयकों पर रहेगी नजर


 Bihar Assembly Monsoon Session 2026 सोमवार से शुरू हो रहा है और 24 जुलाई तक चलेगा। इस बार का Bihar Assembly Monsoon Session कई मायनों में अहम माना जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी में शुरू होने वाले इस सत्र में एक ओर एनडीए सरकार विकास से जुड़े कई विधेयक पेश करेगी, वहीं विपक्ष भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और हाल के विवादित मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का यह पहला मॉनसून सत्र है। सरकार विकास से जुड़े एजेंडे को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष सदन में कई संवेदनशील मुद्दों को उठाने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में यह सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

13 महत्वपूर्ण विधेयकों पर होगी चर्चा

इस मॉनसून सत्र में राज्य सरकार कुल 13 महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश कर सकती है। इनका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि प्रबंधन और विकास योजनाओं को मजबूत करना बताया जा रहा है।

प्रमुख विधेयकों में शामिल हैं—

  • बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026
  • बिहार माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
  • बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026
  • बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026

इनके अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े अन्य विधेयकों पर भी चर्चा और पारित होने की संभावना है।

विकास और बुनियादी ढांचे पर रहेगा सरकार का फोकस

सरकार का दावा है कि इस सत्र में विकास कार्यों को गति देने वाले कई प्रस्ताव लाए जाएंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासनिक सुधार और निवेश से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। सरकार इन विधेयकों को राज्य के विकास की दिशा में अहम कदम बता रही है। वहीं विपक्ष इनके प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा सकता है।

इन मुद्दों पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष

मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष कई ऐसे मामलों को उठा सकता है, जिन पर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बहस जारी है। सबसे पहले भरत तिवारी एनकाउंटर मामला सदन में गूंज सकता है। इस मामले की न्यायिक जांच जारी है। विपक्ष इस पर सरकार से जवाब मांग सकता है और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर सकता है। इसके अलावा भ्रष्टाचार, अपराध और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।

राबड़ी आवास और सुरक्षा का मुद्दा भी बन सकता है चर्चा का केंद्र

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को खाली करने के नोटिस का मामला भी विधानसभा में उठ सकता है। भवन निर्माण विभाग की कार्रवाई के बाद लालू परिवार नए आवास में शिफ्ट हो चुका है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष सरकार के फैसलों पर सवाल उठा सकता है। इसके साथ ही लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की सुरक्षा पहले कम किए जाने और बाद में फिर से बहाल करने का मामला भी सदन में चर्चा का विषय बन सकता है।

टेंडर घोटाले और भ्रष्टाचार पर भी हो सकती है बहस

सरकारी विभागों के कथित टेंडर घोटाले और रिशु श्री से जुड़े मामले भी विपक्ष के निशाने पर रह सकते हैं। इन मामलों में जांच जारी है, लेकिन विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है। इसके अलावा विभिन्न विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी बहस होने की संभावना है।

सत्ता पक्ष भी जवाब देने की तैयारी में

सरकार का कहना है कि विपक्ष जिन मुद्दों को उठाएगा, उनका तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाएगा। सत्ता पक्ष विकास कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और नए विधेयकों के जरिए अपनी उपलब्धियों को सामने रखने की कोशिश करेगा। ऐसे में सदन के भीतर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह मॉनसून सत्र?

यह मॉनसून सत्र केवल विधेयकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला मंच भी बन सकता है। एक तरफ सरकार विकास और प्रशासनिक सुधार का एजेंडा पेश करेगी, वहीं विपक्ष कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और हाल के विवादित मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की कोशिश करेगा। ऐसे में आगामी दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर पूरे राज्य की नजर रहेगी।

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