भरत तिवारी एनकाउंटर: 27 दिन बाद भी पुलिसकर्मी गिरफ्तार नहीं, भाई बोले- सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन परिवार अब भी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर मंगलवार को न्यायिक आयोग के समक्ष दो अहम गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए। मृतक के छोटे भाई चंदन तिवारी ने दावा किया कि घटना के 27 दिन बाद भी आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। मंगलवार को आरा स्थित न्यायिक आयोग कार्यालय में रिटायर जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गवाही की प्रक्रिया जारी रही। चंदन तिवारी के साथ एक अन्य गवाह ने भी आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा।
भाई ने कहा- सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं
गवाही देने के बाद मीडिया से बातचीत में चंदन तिवारी ने कहा कि उन्होंने आयोग के सामने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से रखा। उनके अनुसार, उनके भाई ने कथित मुठभेड़ के दौरान आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने गोली चला दी। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना को एक मुठभेड़ का रूप दिया गया, जबकि परिवार इसे हत्या मानता है। चंदन तिवारी ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष है तो आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के करीब 27 दिन बीत जाने के बावजूद किसी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
न्यायिक आयोग के सामने दर्ज हो रहे लगातार बयान
इस मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग लगातार गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है। अब तक मृतक के माता-पिता, भाई, भाभी समेत सात लोगों की गवाही दर्ज हो चुकी है। चंदन तिवारी के अनुसार, अभी लगभग 25 अन्य लोगों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। आयोग ने बुधवार को भी गवाही की प्रक्रिया जारी रखने का कार्यक्रम तय किया है। चंदन तिवारी विशेष रूप से दिल्ली से आरा पहुंचे ताकि आयोग के समक्ष अपना पक्ष रख सकें। उन्होंने बताया कि आयोग का समन मिलने के बाद उन्होंने अपना कार्यक्रम बदलकर गवाही को प्राथमिकता दी।
प्रत्यक्षदर्शी महिला ने भी लगाए गंभीर आरोप
जवईनियां गांव की विस्थापित ललित देवी ने भी आयोग के सामने अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पूरी घटना अपनी झोपड़ी से देखी थी। उनके अनुसार, भरत भूषण तिवारी ने पहले हथियार छोड़ दिया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें तीन गोलियां मारीं। उन्होंने आयोग से निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने की मांग की। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
क्या है पूरा मामला?
17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई थी। घटना के दौरान भरत भूषण तिवारी फेसबुक लाइव पर थे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को लेकर बाद में विवाद खड़ा हुआ। परिवार का आरोप है कि वीडियो में भरत भूषण तिवारी हथियार छोड़ते दिखाई दिए थे, जिसके बाद लाइव बंद हो गया और फिर पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। दूसरी ओर, पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आयोग अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
एफआईआर दर्ज होने के बाद गठित हुआ न्यायिक आयोग
घटना के बाद मृतक की मां आशा देवी की शिकायत पर मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों और अन्य कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने निष्पक्ष जांच का निर्णय लिया। इसके बाद पटना हाई कोर्ट के रिटायर जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया। आयोग का उद्देश्य सभी पक्षों की गवाही, उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर घटना की निष्पक्ष जांच करना है।
आगे क्या होगा?
जांच आयोग आने वाले दिनों में शेष गवाहों के बयान दर्ज करेगा। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। परिवार लगातार आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से जारी है। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।