मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: ICU में लगी आग से मौतें, जांच के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था


बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। ब्रह्मपुरा स्थित निजी प्रसाद हॉस्पिटल की आईसीयू में तड़के आग लगने से कई मरीजों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। जिला प्रशासन के अनुसार चार लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जबकि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या अधिक होने की चर्चा भी चल रही है। प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम आंकड़ा स्पष्ट होगा।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और मरीजों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया गया।

ICU में तड़के लगी आग, कई मरीज फंसे

जानकारी के अनुसार घटना सुबह करीब 3:20 बजे हुई। अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित आईसीयू में उस समय 15 से अधिक मरीज भर्ती थे। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वेंटिलेटर और अन्य उपकरणों में आग लग गई।

आग तेजी से फैलने के कारण पूरे आईसीयू में धुआं भर गया। इससे मरीजों और उनके परिजनों में भगदड़ मच गई। कई लोगों ने अपने स्तर पर मरीजों को बाहर निकालने का प्रयास किया। राहत टीमों ने करीब 20 मरीजों को सुरक्षित बचाने में सफलता हासिल की।

शॉर्ट सर्किट की आशंका, तकनीकी जांच शुरू

प्रशासन की प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।

जिला प्रशासन ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को जांच में शामिल किया है। अस्पताल के उपकरणों, बिजली व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा सिस्टम की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फायर सेफ्टी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

घटना के बाद अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि आग लगने के समय अस्पताल का फायर हाइड्रेंट प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाया।

कुछ लोगों ने दावा किया कि अग्निशामक यंत्र मौजूद थे, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी तत्काल उपलब्ध नहीं थे। इसी कारण शुरुआती समय में आग पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका।

परिजनों का यह भी आरोप है कि संकट की घड़ी में कई कर्मचारी अस्पताल से बाहर निकल गए, जबकि मरीज और उनके परिवारजन सहायता के लिए संघर्ष करते रहे। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।

प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि घायलों को आसपास के अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मरीजों के परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

पुलिस ने तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों को शामिल किया है। साथ ही अस्पताल परिसर को सुरक्षा कारणों से सील कर दिया गया है ताकि जांच प्रभावित न हो।

मृतकों के परिजनों में आक्रोश

अग्निकांड के बाद मृतकों और घायलों के परिजनों में भारी नाराजगी देखी गई। कई लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए और जवाबदेही तय करने की मांग की।

कुछ परिजनों का कहना है कि यदि समय पर सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय होती और तत्काल बचाव शुरू किया जाता तो नुकसान कम हो सकता था। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों के उपचार और घटना की निष्पक्ष जांच पर है। अधिकारियों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किस वजह से लगी और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई या नहीं।

इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित फायर ऑडिट और आपातकालीन प्रशिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

मुजफ्फरपुर की यह दर्दनाक घटना न केवल प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा आघात है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।

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