बिहार में बेरोजगारी की बड़ी तस्वीर, देश में दूसरे नंबर पर पहुंचे 54 लाख से ज्यादा पंजीकृत युवा
बिहार बेरोजगारी को लेकर सामने आए नए आंकड़ों ने एक बार फिर रोजगार की स्थिति पर चर्चा तेज कर दी है। बिहार बेरोजगारी से जुड़े नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में 54.14 लाख से अधिक लोगों ने रोजगार की तलाश में पंजीकरण कराया है। इस आंकड़े के साथ बिहार देश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इनमें लाखों युवा आज भी सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रहे हैं।
नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल पर देशभर के नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवार पंजीकरण कराते हैं। इसी पोर्टल के माध्यम से रोजगार मेले, निजी कंपनियों की भर्ती और विभिन्न नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
बिहार में कितने पंजीकृत बेरोजगार?
एनसीएस पोर्टल के अनुसार देशभर में अब तक 6.26 करोड़ से अधिक लोगों ने नौकरी के लिए पंजीकरण कराया है।
इनमें बिहार के 54.14 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार शामिल हैं, जो कुल पंजीकरण का लगभग 8.65 प्रतिशत है।
इनमें से करीब 26.67 लाख उम्मीदवार सक्रिय (Active) हैं और नियमित रूप से नौकरी के अवसरों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
राज्यवार तुलना करें तो सबसे अधिक पंजीकरण महाराष्ट्र में हुआ है, जबकि बिहार दूसरे स्थान पर है।
राज्यवार प्रमुख आंकड़े
- महाराष्ट्र – 99.73 लाख
- बिहार – 54.14 लाख
- मध्य प्रदेश – 50 लाख
- उत्तर प्रदेश – 50 लाख
- असम – 41.68 लाख
- पश्चिम बंगाल – 38.99 लाख
- कर्नाटक – 32.84 लाख
आंकड़े बताते हैं कि बिहार में नौकरी की तलाश करने वालों में सबसे अधिक युवा वर्ग शामिल है।
25 से 34 वर्ष आयु वर्ग के 23.44 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। वहीं 18 से 24 वर्ष के 18.13 लाख युवा भी रोजगार की तलाश में हैं।
इसके अलावा 35 से 44 वर्ष के लगभग 7.90 लाख, 45 से 54 वर्ष के 2.97 लाख, 55 से 64 वर्ष के 92 हजार और 16 से 18 वर्ष के करीब 73 हजार लोगों ने भी पंजीकरण कराया है।
64 वर्ष से अधिक आयु के 6,742 लोगों ने भी रोजगार पाने की उम्मीद में एनसीएस पोर्टल का सहारा लिया है।
महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय
बिहार में पंजीकृत बेरोजगारों में पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबरी पर दिखाई देती है।
आंकड़ों के अनुसार 27.29 लाख पुरुष, 26.60 लाख महिलाएं और 523 ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों ने भी रोजगार के लिए अपना पंजीकरण कराया है।
यह आंकड़ा बताता है कि रोजगार की तलाश केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।
पढ़े-लिखे से लेकर पीएचडी धारक भी नौकरी की तलाश में
एनसीएस पोर्टल के आंकड़े शिक्षा के स्तर के हिसाब से भी कई महत्वपूर्ण बातें सामने लाते हैं।
सबसे अधिक पंजीकरण नौवीं से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों ने कराया है।
- नौवीं तक – 15.24 लाख
- दसवीं तक – 12.97 लाख
- बारहवीं तक – 12.74 लाख
- स्नातक – 5.15 लाख
- स्नातकोत्तर – 64 हजार
- डिप्लोमा धारक – 25 हजार
सबसे दिलचस्प बात यह है कि 650 पीएचडी या विशेषज्ञ डिग्रीधारी उम्मीदवारों ने भी रोजगार की तलाश में पंजीकरण कराया है।
वहीं 5.62 लाख निरक्षर लोगों ने भी रोजगार पाने की उम्मीद में एनसीएस पोर्टल का सहारा लिया।
आंकड़ों के अनुसार करीब 55 हजार लोग स्वरोजगार से भी जुड़े हुए हैं।
चुनावी वर्ष में रिकॉर्ड पंजीकरण
बीते वर्ष बिहार में चुनावी माहौल के दौरान एनसीएस पोर्टल पर पंजीकरण में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अप्रैल से अगस्त तक हर महीने हजारों लोगों ने पंजीकरण कराया, लेकिन सितंबर में यह संख्या अचानक बढ़कर 5 लाख तक पहुंच गई।
इसके बाद अक्टूबर में 3.71 लाख, नवंबर में 1.41 लाख, दिसंबर में 1.06 लाख, जनवरी में 76 हजार, फरवरी में 72 हजार और मार्च में 70 हजार से अधिक लोगों ने नौकरी के लिए पंजीकरण कराया।
साल-दर-साल तेजी से बढ़े पंजीकरण
बिहार में पिछले चार वर्षों के दौरान एनसीएस पोर्टल पर पंजीकरण में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
| वर्ष | पंजीकरण |
|---|---|
| 2022-23 | 4,414 |
| 2023-24 | 1,33,667 |
| 2024-25 | 9,01,188 |
| 2025-26 | 16,82,043 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि रोजगार की तलाश में पंजीकरण कराने वालों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। हालांकि, यह आंकड़ा केवल एनसीएस पोर्टल पर पंजीकृत उम्मीदवारों का है और इसे राज्य की कुल बेरोजगारी दर का प्रत्यक्ष मापदंड नहीं माना जा सकता।
क्या बताते हैं ये आंकड़े?
एनसीएस पोर्टल पर बढ़ते पंजीकरण यह संकेत देते हैं कि बड़ी संख्या में लोग औपचारिक रोजगार के अवसरों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि रोजगार मेले, निजी कंपनियों की भर्ती और सरकारी रोजगार सेवाओं तक पहुंच के लिए एनसीएस पोर्टल का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास और निजी निवेश जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रयास से ही बड़ी संख्या में नौकरी चाहने वाले युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
