बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली, वीक्षकों के पास मिला सॉल्व्ड आंसर शीट
बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान हाजीपुर के एक परीक्षा केंद्र पर दो वीक्षक संदिग्ध गतिविधियों में पकड़े गए। अधिकारियों की जांच में उनके पास 1 से 100 प्रश्नों तक के कथित सॉल्व्ड उत्तर वाला कागज मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टेटिक दंडाधिकारी की शिकायत पर केंद्र अधीक्षक समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।
यह मामला 28 जून को आयोजित केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती), बिहार की लिखित परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा बिहार पुलिस, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, बिहार पुलिस दूरसंचार (वितंतु) और तकनीकी अराजपत्रित संवर्ग में सिपाही (प्रचालक) पदों की भर्ती के लिए आयोजित की गई थी।
हाजीपुर के परीक्षा केंद्र पर सामने आई संदिग्ध गतिविधि
जानकारी के अनुसार, हाजीपुर के वासुदेवपुर चपुता स्थित नोबेल क्रिएटिव एकैडमी परीक्षा केंद्र पर परीक्षा समाप्त होने के बाद अधिकारियों ने निरीक्षण किया।
स्टेटिक दंडाधिकारी सुशील कुमार, जोनल दंडाधिकारी तनुजा और पुलिस अधिकारियों की टीम जब कमरा नंबर-1 में पहुंची तो वहां मौजूद दो वीक्षकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पूछताछ में उनकी पहचान मुकुल कुमार और सचिन कुमार के रूप में हुई।
अधिकारियों ने तत्काल दोनों से पूछताछ शुरू की और उनके पास मौजूद सामग्री की जांच की।
वीक्षक के पास मिला 1 से 100 तक का सॉल्व्ड उत्तर
जांच के दौरान एक वीक्षक मुकुल कुमार के हाथ में एक कागज मिला। अधिकारियों के अनुसार उस कागज पर क्रम संख्या 1 से 100 तक प्रश्नों के संभावित उत्तर लिखे हुए थे।
कागज में प्रत्येक प्रश्न के सामने A, B, C जैसे विकल्प अंकित थे। अधिकारियों ने इसे जब्त कर लिया और मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।
इस बरामद दस्तावेज की जांच अब पुलिस और संबंधित एजेंसियां कर रही हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसका परीक्षा से क्या संबंध था।
केंद्र अधीक्षक पर भी लगे गंभीर आरोप
प्राथमिकी में केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
स्टेटिक दंडाधिकारी के अनुसार, पूछताछ के लिए दोनों वीक्षकों को विद्यालय कार्यालय में बैठाया गया था। इसी दौरान केंद्र अधीक्षक वहां पहुंचीं और अधिकारियों के साथ बहस करते हुए दोनों वीक्षकों को वहां से जाने दिया।
शिकायत में कहा गया है कि अधिकारियों के बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्होंने दोनों वीक्षकों को दोबारा उपस्थित नहीं कराया।
एफआईआर दर्ज कराने से भी किया इनकार
स्टेटिक दंडाधिकारी की शिकायत के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर आपत्तिजनक सामग्री मिलने के बाद नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराने की जिम्मेदारी केंद्र अधीक्षक की थी।
आरोप है कि उन्होंने थाना जाकर शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया और अपने घर चली गईं।
शिकायत में यह भी कहा गया कि कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्होंने वीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने में सहयोग नहीं किया। इसी आधार पर उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में मानी गई है।
तीन लोगों पर दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले में स्टेटिक दंडाधिकारी सुशील कुमार की शिकायत पर काजीपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एफआईआर में वीक्षक मुकुल कुमार, सचिन कुमार और केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना को नामजद किया गया है। इनके खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह केवल व्यक्तिगत स्तर की घटना थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवाल
बिहार में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे में परीक्षा केंद्र पर वीक्षकों के पास कथित सॉल्व्ड उत्तर मिलने की घटना ने अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए परीक्षा केंद्रों की निगरानी और अधिक सख्त करने की आवश्यकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
