
बिहार फ्री बिजली योजना को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। बिहार फ्री बिजली योजना के तहत अब लोगों को न केवल सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी, बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन करने पर उनके बैंक खाते में सीधे पैसे भी भेजे जाएंगे। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए कहा कि बिहार को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। राजधानी पटना के जे.पी. गंगा पथ पर आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर सिस्टम और सोलर आधारित बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने जा रही है। इसका सीधा लाभ लाखों परिवारों को मिलेगा।
5 लाख घरों में लगेगा सोलर सिस्टम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि योजना के पहले चरण में करीब 5 लाख घरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आम लोगों को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत मिले और वे स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएंगी। इससे लोगों को अपनी जेब से अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि सोलर ऊर्जा के विस्तार से बिजली उत्पादन की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी खर्च
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रति घर 33 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। इसके बाद सोलर सिस्टम लगाने में जो अतिरिक्त खर्च बचेगा, उसे बिहार सरकार वहन करेगी। इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी बिना वित्तीय बोझ के इस योजना का लाभ उठा सकें। सरकार के अनुसार, आगामी 15 तारीख से केंद्र सरकार के साथ समझौता (एमओयू) कर इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।
125 यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन पर मिलेगा पैसा
योजना का सबसे आकर्षक पहलू अतिरिक्त बिजली उत्पादन पर मिलने वाला आर्थिक लाभ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन घरों में सोलर सिस्टम लगेगा और जहां 125 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होगा, वहां अतिरिक्त बिजली के बदले सरकार उपभोक्ताओं के बैंक खाते में सीधे भुगतान करेगी। इस व्यवस्था को नेट मीटरिंग मॉडल से जोड़ा जाएगा, जिससे उपभोक्ता केवल बिजली बचाएंगे ही नहीं, बल्कि उससे आय भी अर्जित कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों के लिए अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बन सकता है।
दो वर्षों में 50 लाख घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को अगले दो वर्षों के भीतर 50 लाख घरों तक सोलर आधारित बिजली पहुंचाने का लक्ष्य दिया है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो बिहार देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां घरेलू स्तर पर सोलर ऊर्जा का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। इससे राज्य की पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
बिजली सब्सिडी का बोझ घटाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में बिहार सरकार हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपये बिजली सब्सिडी पर खर्च करती है। सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देकर सरकार इस वित्तीय बोझ को धीरे-धीरे कम करना चाहती है। साथ ही, इससे बिजली उत्पादन के वैकल्पिक स्रोत विकसित होंगे और ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार देखने को मिल सकते हैं। सरकार का मानना है कि यह योजना केवल बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रोजगार, निवेश और पर्यावरण संरक्षण के नए अवसर भी पैदा करेगी।
बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
बिहार में बढ़ती ऊर्जा मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए सोलर ऊर्जा एक प्रभावी समाधान मानी जा रही है। रूफटॉप सोलर सिस्टम के जरिए उपभोक्ता अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकेंगे। इसके अलावा, अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने की सुविधा इस योजना को और अधिक आकर्षक बनाती है। यही वजह है कि सरकार इसे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तनकारी पहल के रूप में देख रही है। आने वाले महीनों में योजना के क्रियान्वयन और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद लाखों परिवार इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे।