बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार कॉलेज भर्ती 2026 के तहत राज्य सरकार ने करीब 26 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति की तैयारी शुरू कर दी है। बिहार कॉलेज भर्ती 2026 से लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता खुलेगा और विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार रिक्त पदों की पहचान पूरी कर ली गई है। अब नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। सरकार का लक्ष्य वर्ष के अंत तक भर्ती प्रक्रिया पूरी करना है, जिससे कॉलेजों में शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों में सुधार हो सके।
26 हजार पदों पर होगी भर्ती
राज्य सरकार की योजना के अनुसार कुल लगभग 26 हजार पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें कॉलेज शिक्षकों, व्याख्याताओं और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के पद शामिल हैं।
मौजूदा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब 6,600 व्याख्याताओं तथा 11 हजार से अधिक गैर शैक्षणिक कर्मियों की भर्ती प्रस्तावित है। इसके अलावा नए डिग्री कॉलेजों के लिए भी हजारों पदों का सृजन किया गया है।
यह भर्ती राज्य के 13 विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में की जाएगी, जहां लंबे समय से बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं।
वर्तमान में कितने पद हैं खाली?
उच्च शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार कॉलेज शिक्षकों के कुल 12,411 स्वीकृत पद हैं। इनमें से केवल लगभग 5,800 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 6,611 पद खाली हैं।
वहीं गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के कुल 16,557 पदों में से 5,583 पदों पर ही नियुक्ति है। लगभग 10,974 पद अभी भी रिक्त हैं।
इस तरह शिक्षकों के करीब 55 प्रतिशत और गैर शैक्षणिक कर्मियों के 60 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। यही वजह है कि कई कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
211 नए डिग्री कॉलेजों में भी मिलेगी नौकरी
राज्य सरकार ने उन 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने की योजना बनाई है, जहां अभी तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं है।
इन कॉलेजों के लिए प्रत्येक संस्थान में 44 नए पद सृजित किए गए हैं। इनमें 32 शिक्षक और 12 गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के पद शामिल हैं।
यदि सभी प्रस्तावित कॉलेज शुरू होते हैं तो कुल 6,752 शिक्षकों और 2,532 गैर शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति होगी। यानी केवल नए कॉलेजों में ही 9,284 पदों पर भर्ती का अवसर उपलब्ध होगा।
राज्य मंत्रिपरिषद इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
क्यों जरूरी हो गई है यह भर्ती?
पिछले कई वर्षों से नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है।
कई विभाग ऐसे हैं जहां स्थायी शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। इसके कारण पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता और छात्रों को शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से कॉलेजों में कक्षाएं नियमित होंगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।
छात्रों पर क्या पड़ रहा है असर?
शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों पर दिखाई देता है।
कई कॉलेजों में सत्र समय से पीछे चल रहा है। परीक्षा और परिणाम में देरी होने से छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इतना ही नहीं, कई बार रिजल्ट समय पर जारी नहीं होने से छात्र बीपीएससी, एसएससी और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन भी समय पर नहीं भर पाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पद भरने से परीक्षा प्रणाली और शैक्षणिक कैलेंडर दोनों में सुधार आएगा।
मंत्री ने क्या कहा?
उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उच्च शिक्षण संस्थानों में निर्बाध अध्ययन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है और जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
मंत्री के अनुसार शिक्षकों और कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ने से कॉलेजों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
उच्च शिक्षा को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भर्ती समय पर पूरी हो जाती है तो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
एक तरफ कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, वहीं दूसरी ओर नए डिग्री कॉलेज खुलने से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को भी उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।
यह भर्ती केवल रोजगार का अवसर नहीं बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
