भरत तिवारी एनकाउंटर पर NDA में बढ़ी तकरार, चिराग ने मांझी के बयान पर जताई नाराजगी


 

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति में बहस तेज होती जा रही है। भरत तिवारी एनकाउंटर पर जहां केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है, वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने उनके बयान पर आपत्ति जताई है। दोनों नेताओं के अलग-अलग रुख ने इस मामले को कानून-व्यवस्था के मुद्दे से आगे बढ़ाकर राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है।

मामले में अब केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। एनडीए के भीतर सामने आए मतभेदों ने इस प्रकरण को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।

चिराग पासवान ने मांझी के बयान को बताया संवेदनहीन

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर चिराग पासवान ने स्पष्ट कहा कि किसी परिवार ने अपना बेटा खोया हो, ऐसे समय में संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने जीतन राम मांझी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी प्रतीत होती है।

चिराग का कहना है कि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच पूरी होनी चाहिए। जब तक सभी तथ्य सामने नहीं आते, तब तक किसी भी पक्ष को पूरी तरह सही या गलत ठहराना उचित नहीं होगा।

किस बयान पर शुरू हुआ विवाद?

एनकाउंटर के बाद जीतन राम मांझी का एक बयान काफी चर्चा में आया था। उन्होंने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस पर हथियार तानेगा या कानून को चुनौती देगा तो पुलिस कार्रवाई करेगी।

मांझी के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई। विपक्षी दलों के साथ-साथ कुछ सहयोगी नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जांच पूरी होने से पहले दिए गए ऐसे बयान अक्सर विवाद का कारण बन जाते हैं, क्योंकि मामले के सभी तथ्य उस समय तक सार्वजनिक नहीं होते।

एनकाउंटर को सही ठहरा रहे हैं जीतन राम मांझी

विवाद बढ़ने के बावजूद जीतन राम मांझी अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें पुलिस की कार्रवाई उचित लगती है।

मांझी का तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति ने हथियार के साथ पुलिस को चुनौती दी हो तो पुलिस के पास जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरोप लगने से पुलिस की कार्रवाई को गलत नहीं माना जा सकता। मामले को सभी तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

परिवार के दावों पर भी उठाए सवाल

जीतन राम मांझी ने मृतक के परिवार द्वारा किए गए कुछ दावों पर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भरत तिवारी मानसिक रूप से अस्थिर थे, जैसा कि परिवार की ओर से कहा गया है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उनके पास हथियार कैसे पहुंचा।

मांझी ने यह सवाल भी उठाया कि यदि ऐसी स्थिति थी तो परिवार ने समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए। उनके अनुसार, जांच में इन पहलुओं की भी पड़ताल होनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच की मांग पर जोर

चिराग पासवान ने पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में तथ्यों के सामने आने का इंतजार करना चाहिए। जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मांग लगातार उठ रही है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और जो भी तथ्य सामने आएं, उन्हें सार्वजनिक किया जाए।

एनडीए के भीतर अलग-अलग राय क्यों महत्वपूर्ण?

राजनीतिक दृष्टि से यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एनडीए के दो प्रमुख नेताओं की राय अलग-अलग दिखाई दी है।

हालांकि दोनों नेता अपने-अपने दृष्टिकोण से बात कर रहे हैं, लेकिन इससे यह स्पष्ट हुआ है कि संवेदनशील मामलों पर राजनीतिक दलों के भीतर भी अलग-अलग विचार हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय होता है।

आगे क्या?

फिलहाल पूरे मामले पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें उठ रहे सवालों के जवाब क्या हैं।

तब तक यह मामला बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना रहने की संभावना है।

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