विक्रमशिला सेतु पर जल्द लौटेगी रफ्तार, 8 जून से शुरू हो सकता है आवागमन


 

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले एक महीने से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बहाल करने का काम तेजी से चल रहा है और यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो 8 जून से इस महत्वपूर्ण पुल पर दोबारा यातायात शुरू हो सकता है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम दिन-रात काम कर रही है ताकि भागलपुर और उत्तर बिहार के बीच संपर्क जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद लाखों लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवागमन पर इसका सीधा असर पड़ा था। अब निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंचने से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

बेली ब्रिज निर्माण अंतिम चरण में

विक्रमशिला सेतु पर यातायात बहाल करने के लिए बीआरओ द्वारा बेली ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार तीसरे बेली ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि चौथे बेली ब्रिज के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

बीआरओ के अधीक्षण अभियंता की निगरानी में चौथे ब्रिज के फाउंडेशन का काम आगे बढ़ाया गया। हालांकि शुक्रवार को हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए काम प्रभावित हुआ, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शेष कार्य को रात में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

निर्माण एजेंसियों का लक्ष्य है कि तय समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक तकनीकी कार्य पूरे कर लिए जाएं ताकि यातायात बहाली में और देरी न हो।

डीएम ने किया निरीक्षण, दिए सख्त निर्देश

भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने शुक्रवार को निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बीआरओ और अन्य संबंधित अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट ली और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

डीएम ने कहा कि हर हाल में 7 जून तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि 8 जून से पुल पर वाहनों का संचालन शुरू किया जा सके।

पहले प्रशासन ने 5 जून तक यातायात बहाल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन आंधी और बारिश के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे निर्माण कार्य की गति पर असर पड़ा। इसी वजह से समयसीमा को दो दिन आगे बढ़ाया गया।

क्यों अहम है विक्रमशिला सेतु?

विक्रमशिला सेतु भागलपुर को उत्तर बिहार के कई जिलों से जोड़ने वाला एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। यह पुल गंगा नदी पर बना है और वर्षों से क्षेत्रीय परिवहन की रीढ़ माना जाता है।

3 मई की रात पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए देर रात आवागमन रोक दिया था। अधिकारियों का मानना था कि यदि समय रहते यातायात नहीं रोका जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

पुल बंद होने के बाद भागलपुर, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और आसपास के कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हो गया। लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ी।

रक्षा मंत्रालय की पहल से तेज हुआ काम

पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहल पर सीमा सड़क संगठन की टीम को मौके पर भेजा गया।

बीआरओ ने स्थिति का आकलन करने के बाद बेली ब्रिज निर्माण की योजना तैयार की और युद्धस्तर पर काम शुरू किया। विशेषज्ञों की टीम लगातार मौके पर मौजूद रहकर निर्माण कार्य की निगरानी कर रही है।

इसी तेज कार्रवाई के कारण अब यातायात बहाली की उम्मीद समय से पहले दिखाई दे रही है।

रिंग रोड परियोजना से मिलेगा स्थायी विकल्प

इस बीच राज्य सरकार ने क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक नई योजना पर भी काम शुरू कर दिया है। पथ निर्माण मंत्री शैलेन्द्र कुमार के अनुसार विक्रमशिला सेतु क्षेत्र को करीब 50 किलोमीटर लंबे रिंग रोड नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी चल रही है।

इस परियोजना के तहत अगुआनी घाट तक संपर्क मार्ग विकसित किया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

रिंग रोड बनने से लोगों को वैकल्पिक आवागमन मार्ग मिलेगा। साथ ही गंगा और कोसी क्षेत्र में कटाव की समस्या से प्रभावित इलाकों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

मानसून से पहले कटावरोधी कार्यों पर जोर

सरकार ने कोसी और गंगा तटबंध से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में कटावरोधी कार्यों को भी प्राथमिकता दी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मानसून शुरू होने से पहले ही सभी जरूरी सुरक्षा कार्य पूरे कर लिए जाएं।

लत्तीपुर, नन्हकार, राघोपुर, कालूचक, विष्पुरिया और अन्य कटाव प्रभावित इलाकों में पहले से काम शुरू कराया जा चुका है। इससे संभावित बाढ़ और कटाव के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

विक्रमशिला सेतु पर यातायात बहाली और नई सड़क परियोजनाएं आने वाले समय में क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

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