पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर बोले विजय चौधरी, ‘सरकार ने बढ़ोतरी को काफी नियंत्रित रखा’


 

पटना में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम अब आम लोगों की चिंता का बड़ा कारण बन चुके हैं। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ चुके हैं और राजधानी पटना में पेट्रोल 113 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों को लेकर जब बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे वैश्विक संकट से जुड़ा मुद्दा बताया।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस समय ऊर्जा संकट का सामना कर रही है और भारत में सरकार नियंत्रित तरीके से कीमतों को संभालने की कोशिश कर रही है। डिप्टी सीएम का यह बयान ऐसे समय आया है जब महंगाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

10 दिनों में चार बार बढ़े ईंधन के दाम

पटना में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में लगातार तेजी देखी गई है। पहले जहां पेट्रोल करीब 106 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत 113 रुपये के पार पहुंच चुकी है।

डीजल के दाम में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों के घरेलू बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। खासकर रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

ईंधन महंगा होने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

विजय कुमार चौधरी ने क्या कहा?

बढ़ती कीमतों को लेकर पूछे गए सवाल पर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि दुनिया का हर व्यक्ति समझ रहा है कि पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में जितनी तेजी से कीमतें बढ़नी चाहिए थीं, उसके मुकाबले भारत सरकार नियंत्रित तरीके से कम बढ़ोतरी कर रही है। उनके अनुसार यह सरकार की आर्थिक नीति और प्रबंधन का परिणाम है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता के कारण कई देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं।

ईरान-अमेरिका तनाव का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है।

खाड़ी क्षेत्र दुनिया के बड़े तेल उत्पादक इलाकों में शामिल है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करती है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई देता है।

आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन चलाने वाले लोगों का कहना है कि हर कुछ दिनों में कीमत बढ़ने से खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा। इसका असर आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

महंगाई पहले से ही आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा लोगों की चिंता और बढ़ा रहा है।

पीएम मोदी की तारीफ पर भी बोले डिप्टी सीएम

बातचीत के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक स्तर पर हो रही तारीफ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई विश्व नेता प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हैं।

उनके अनुसार भारत तेजी से मजबूत अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और दुनिया में देश की स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए गर्व की बात बताया।

हालांकि विपक्ष का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच सरकार को आम लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

आगे और बढ़ सकते हैं दाम?

ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल लोग सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

बढ़ती कीमतों के बीच अब सभी की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।

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