
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट TMC याचिका पर सुनवाई में बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट TMC याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने चुनाव आयोग के फैसले में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। फैसले के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, खासकर पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से ठीक पहले।
TMC ने काउंटिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान टीएमसी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना था कि काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में राज्य के कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है।
टीएमसी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के खिलाफ काम कर रहा है। पार्टी का दावा था कि इस फैसले से काउंटिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि चुनाव आयोग एकतरफा फैसले नहीं ले सकता और इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के आरोपों पर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस आधार के इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते।
कोर्ट ने कहा कि चाहे राज्य के कर्मचारी हों या केंद्र के, सभी चुनाव आयोग के अधीन काम करते हैं और निष्पक्षता बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है।
साथ ही अदालत ने यह भी बताया कि काउंटिंग प्रक्रिया में केवल सुपरवाइजर ही नहीं होंगे, बल्कि उम्मीदवारों के प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
चुनाव आयोग का पक्ष भी आया सामने
चुनाव आयोग ने अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि काउंटिंग प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखा जाएगा। आयोग ने बताया कि इसमें राज्य सरकार का भी एक कर्मचारी शामिल होगा।
आयोग के इस जवाब को सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया और उसके सर्कुलर में किसी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
इससे साफ हो गया कि कोर्ट चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर संतुष्ट है और उसमें बदलाव की जरूरत नहीं मानता।
TMC को बड़ा झटका, नहीं मिली राहत
इस फैसले को टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अदालत ने एडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (ACEO) के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया में चुनाव आयोग की स्वायत्तता को मजबूत करता है। वहीं विपक्ष इसे अपने पक्ष में मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है।
4 मई को आएंगे चुनाव परिणाम
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न हुए थे। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान हुआ था।
अब सभी की नजरें 4 मई 2026 पर टिकी हैं, जब चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस फैसले के बाद चुनावी माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
क्या है इस फैसले का महत्व?
यह फैसला सिर्फ एक याचिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी अहम संकेत देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बिना ठोस सबूत के चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों पर भी असर पड़ सकता है।
Source: उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स