बिहार में होने जा रहे सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार को सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। गुरुवार को गांधी मैदान में होने वाले सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार में कुल 31 नेता मंत्री पद की शपथ लिए । बीजेपी, जेडीयू और एनडीए के सहयोगी दलों ने जातीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन किया है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह मंत्रिमंडल विस्तार आगामी चुनावी रणनीति और बिहार के जातीय गणित दोनों को साधने की कोशिश है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ने अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ नए सामाजिक समूहों को भी संदेश देने की तैयारी की है।
बीजेपी ने सवर्ण-OBC संतुलन पर लगाया जोर
बीजेपी कोटे से कुल 15 नेता मंत्री पद की शपथ लिए । इनमें 6 सवर्ण, 7 ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग से जबकि 2 दलित समाज से शामिल हैं।
सवर्ण समाज में भूमिहार, राजपूत और ब्राह्मण समुदाय को बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया है। वहीं पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग से भी कई चेहरों को जगह मिली है।
बीजेपी कोटे से मंत्री बनने वाले नेताओं की सूची इस प्रकार है:
- विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार, सवर्ण)
- दिलीप जायसवाल (कलवार, वैश्य, पिछड़ा)
- रामकृपाल यादव (यादव, पिछड़ा)
- मिथलेश तिवारी (ब्राह्मण, सवर्ण)
- रमा निषाद (मल्लाह, अति पिछड़ा)
- केदार गुप्ता (कानू, वैश्य, अतिपिछड़ा)
- नीतीश मिश्रा (ब्राह्मण, सवर्ण)
- प्रमोद चंद्रवंशी (चंद्रवंशी, अति पिछड़ा)
- लखेंद्र पासवान (पासवान, दलित)
- संजय टाइगर (राजपूत, सवर्ण)
- ई कुमार शैलेन्द्र (भूमिहार, सवर्ण)
- अरुण शंकर प्रसाद (सूड़ी, वैश्य, पिछड़ा)
- रामचंद्र प्रसाद (तेली, अति पिछड़ा)
- नंद किशोर राम (रविदास, दलित)
- श्रेयसी सिंह (राजपूत, सवर्ण)
बीजेपी ने इस सूची के जरिए सवर्ण और गैर-यादव पिछड़ा वर्ग दोनों को साधने की कोशिश की है।
जेडीयू ने EBC और दलित समीकरण पर फोकस किया
जेडीयू कोटे से कुल 13 मंत्री बनाए जा रहे हैं। इनमें 8 ओबीसी और ईबीसी समुदाय से, 3 दलित समाज से, 1 मुस्लिम और 1 सवर्ण नेता शामिल हैं।
जेडीयू ने खासतौर पर कुर्मी, धानुक, मल्लाह और दलित समुदाय पर फोकस किया है। पार्टी ने अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।
जेडीयू कोटे से मंत्री बनने वाले संभावित नेताओं की सूची:
- श्रवण कुमार (कुर्मी, पिछड़ा)
- निशांत कुमार (कुर्मी, पिछड़ा)
- मदन सहनी (मल्लाह, अति पिछड़ा)
- लेसी सिंह (राजपूत, सवर्ण)
- दामोदर रावत (धानुक, अति पिछड़ा)
- श्रीभगवान सिंह कुशवाहा (कुशवाहा, पिछड़ा)
- बुलो मंडल (धानुक, अति पिछड़ा)
- श्वेता गुप्ता (सूड़ी, वैश्य, पिछड़ा)
- सुनील कुमार (रविदास, दलित)
- शीला मंडल (धानुक, अति पिछड़ा)
- रत्नेश सदा (मुसहर, दलित)
- जमा खान (मुस्लिम)
- अशोक चौधरी (पासी, दलित)
जेडीयू ने मुस्लिम प्रतिनिधित्व देकर अल्पसंख्यक समुदाय को भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
सहयोगी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व
एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) से दो नेताओं को मंत्री बनाया जा रहा है।
लोजपा (आर) कोटे से मंत्री:
- संजय पासवान (पासवान, दलित)
- संजय सिंह (राजपूत, सवर्ण)
वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी HAM (से.) से उनके बेटे संतोष कुमार सुमन मंत्री बनेंगे। वे मुसहर समुदाय से आते हैं।
उधर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से दीपक प्रकाश मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, जो कुशवाहा समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
NDA की सोशल इंजीनियरिंग क्या संदेश दे रही?
इस पूरे मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे खास बात जातीय संतुलन दिखाई दे रहा है। सवर्ण, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदाय के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर एनडीए ने व्यापक सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में यह कैबिनेट विस्तार आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनने वाली नई टीम के जरिए एनडीए सरकार विकास और सामाजिक संतुलन दोनों का संदेश देने की तैयारी में है।
गांधी मैदान में हुआ ऐतिहासिक शपथ ग्रहण
गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ । यह पहली बार होगा जब बिहार में इतने बड़े स्तर पर सार्वजनिक मंच से मंत्रिमंडल विस्तार किया जा रहा है।
समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
