केरल विधानसभा चुनाव में RJD की जीत केरल को लेकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। RJD की जीत केरल में कुथुपरम्बा सीट पर पार्टी उम्मीदवार पीके प्रवीण की जीत ने सबका ध्यान खींचा है। उन्होंने कड़े मुकाबले में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की उम्मीदवार को हराकर यह सीट अपने नाम की। इस जीत से राष्ट्रीय जनता दल ने दक्षिण भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
कुथुपरम्बा सीट पर कड़ा मुकाबला, RJD की जीत
कुथुपरम्बा विधानसभा सीट पर इस बार कुल 9 उम्मीदवार मैदान में थे। मुकाबला मुख्य रूप से RJD और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के बीच रहा।
RJD उम्मीदवार पीके प्रवीण ने 70,448 वोट हासिल किए। वहीं उनकी प्रतिद्वंद्वी जयंती राजन को 69,162 वोट मिले।
इस तरह पीके प्रवीण ने 1,286 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। बीजेपी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।
लगातार दूसरी बार इस सीट पर RJD का कब्जा
यह पहली बार नहीं है जब इस सीट पर RJD ने जीत दर्ज की हो।
2021 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के केपी मोहन ने यहां जीत हासिल की थी। लगातार दूसरी जीत ने इस सीट पर RJD की पकड़ को मजबूत किया है।
इस परिणाम से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी का स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन काम कर रहा है।
पीके प्रवीण कौन हैं?
पीके प्रवीण पेशे से एक बिजनेसमैन हैं और साफ-सुथरी छवि के नेता माने जाते हैं।
चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 3.27 करोड़ रुपये की संपत्ति है। इसमें चल और अचल दोनों संपत्तियां शामिल हैं।
उन पर करीब 15 लाख रुपये की देनदारी है, लेकिन उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से एमए और एम.फिल की पढ़ाई की है।
केरल में अलग रणनीति के साथ उतरी RJD
दिलचस्प बात यह है कि बिहार में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाली RJD ने केरल में अलग रणनीति अपनाई।
यहां पार्टी ने वाम दलों के साथ तालमेल कर चुनाव लड़ा। RJD ने कुल तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।
इनमें से कुथुपरम्बा सीट पर जीत हासिल कर पार्टी ने अपनी रणनीति को सफल साबित किया।
तेजस्वी यादव का प्रचार और सियासी चर्चा
RJD नेता तेजस्वी यादव भी केरल में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे।
उनका अंग्रेजी में दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इसको लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिली।
विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए, जबकि RJD ने इसे सामान्य राजनीतिक गतिविधि बताया।
केरल में सत्ता समीकरण और बड़ा बदलाव
केरल में इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।
रुझानों के अनुसार, कांग्रेस 60 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं वामपंथी दलों को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले दस वर्षों से वाम दलों की सरकार रही, लेकिन इस बार सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं।
दक्षिण भारत में RJD की मौजूदगी का संकेत
RJD की यह जीत सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत पार्टी के लिए दक्षिण भारत में अपनी पहचान मजबूत करने का संकेत है।
हालांकि पार्टी को यहां अभी लंबा सफर तय करना है, लेकिन यह परिणाम भविष्य की संभावनाओं को दिखाता है।
क्या कहता है यह चुनाव परिणाम?
कुथुपरम्बा सीट का परिणाम बताता है कि क्षेत्रीय दल भी सही रणनीति और स्थानीय समर्थन के बल पर नए इलाकों में जगह बना सकते हैं।
RJD की यह जीत राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आने वाले समय में दक्षिण भारत में अपनी पकड़ कैसे मजबूत करती है।
